इस सिम का उपयोग भारत की सुरक्षा में सेंध लगा रहा है। इतना ही नहीं धारचूला पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी जाने-अनजाने में इस सिम का प्रयोग करते पाए गए।
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उत्तराखंड से लगी सीमा की सुरक्षा पर संचार की सेंध लग रही है। तिब्बत और नेपाल की सीमा पर स्थित धारचूला और आसपास के क्षेत्रों में नेपाली कंपनियों के मोबाइल नेटवर्क के भरोसे ही संचार व्यवस्था बनी हुई है।
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हरीश रावत
बृहस्पतिवार को यहां दौरे पर आए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी नेपाल की संचार कंपनियों के सिम का उपयोग किया। काली नदी के उस पार नेपाल में पांच मोबाइल कंपनियों के टावर लगे हैं।
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इसमें स्काई, नमस्ते, मेरो, एनसिल आदि प्रमुख हैं। इनका भारतीय लोग भी बड़ी संख्या में उपयोग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ ही सरकारी कर्मचारी एवं सुरक्षा बल भी नेपाली संचार सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।
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मोबाइल टॉवर
नेपाली संचार सेवाओं का नेटवर्क दुर्गम क्षेत्रों तक फैला है। इस कारण खेला, चौदांस के सभी गांव सहित सेना की अग्रिम चौकियों में रहने वाले सैनिक एवं गर्ब्यांग, गुंजी, कालापानी, नाबी, रौंगकांग, नपलच्यू आदि स्थानों पर बेहिचक नेपाली सिम का प्रयोग हो रहा है।
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money shimla
इससे सुरक्षा व्यवस्था पर तो प्रश्न चिन्ह लग ही रहा है। इसके साथ ही करोड़ों रुपए का राजस्व भी नेपाल को जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब पांच हजार भारतीयों के पास नेपाली सिम हैं। नेपाल सिम का उपयोग करने पर कॉल रेट भारतीय रुपए के हिसाब से 60 पैसा प्रति मिनट और नेपाल का एक रुपया। इंटरनेट का उपयोग करने पर भारतीय 300 रुपए बिना डाउनलोडिंग के खर्च होता है, जबकि नेपाल का 500 रुपया होता है।
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किरण रिजिजू
व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा के मुताबिक लंबे संघर्ष के बाद मोबाइल टावर लगाया गया, लेकिन उसकी सेवाएं बेहद खराब है। पिछले दिनों क्षेत्र के दौरे पर आए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू के सामने भी यह मुद्दा उठ चुका है। उन्होंने संचार सेवा में सुधार लाने के दावे का भी फिलहाल कहीं कोई असर नहीं दिखा है।
यह तब है जब सीमा सुरक्षा को खास तवज्जो देने की बात रिजिजू ने की थी। पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद यहां पहुंचे रिजिजू ने इस सीमा को भी पूरी तरह से सुरक्षित बताया था।