विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने से असंतुष्टों का चुनाव में उतरना नई बात नहीं है, लेकिन अगर वर्ष 2012 से तुलना की जाए तो इस बार भाजपा और कांग्रेस की दिक्कतें बढ़ने वाली हैं।
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जहां 2012 में लगभग एक दर्जन सीटों पर असंतुष्टों ने अपनी पार्टी को मात दी थी, वहीं इस बार अकेली भाजपा में दर्जन भर बागी हैं। उधर, कांग्रेस के लिए भाजपा के बागियों के साथ पीडीएफ भी परेशानी बढ़ाती दिख रही है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने असंतुष्टों के चलते अधिक नुकसान झेला था।
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हरीश रावत
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वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज बागियों ने किसी भी दल को बहुमत का आंकड़ा नहीं छूने दिया था। मजबूत दावेदारों के चुनावी समीकरण बिगाड़ कर विरोधियों के मंसूबों पर खरा उतरने वाले बागियों ने कांग्रेस को अधिक नुकसान पहुंचाया था।
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हरक सिंह रावत
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हालांकि अभी तक दोनों राष्ट्रीय दलों में टिकट आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, लेकिन असंतुष्टों बगावत के तेवर अभी से दिखने शुरू हो गए हैं। भाजपा को उन सभी सीटों पर अपने पुराने प्रत्याशियों का विरोध झेलना होगा, जहां के विधायक दल बदल कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
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मंत्री प्रसाद नैथानी
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इसी तरह से कांग्रेस के पास दो बागी भीम लाल और दान सिंह भाजपा से मिले हैं जबकि पीडीएफ से मंत्री प्रसाद नैथानी, प्रीतम सिंह, दिनेश धने और दुर्गापाल हैं, जिनको टिकट देने के नाम पर अभी से घमासान मचा हुआ है।
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किशोर उपाध्याय
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट तक के चुनावी क्षेत्रों पर स्थिति अस्पष्ट बनी हैं। अब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने मंथन शुरू कर दिया है, जिससे कम से कम नुकसान अंतिम नतीजों पर पड़े।
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रमेश पोखरियाल निशंक
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वर्ष 2012 में बगावत का असर
डोईवाला - कांग्रेस ने हीरा सिंह बिष्ट को टिकट दिया तो एसपी सिंह ने बगावत कर दी। एसपी सिंह को 11241 मत मिले जबकि पार्टी प्रत्याशी बिष्ट 22176 वोट हासिल करने के बाद महज 1272 वोट से भाजपा प्रत्याशी रमेश पोखरियाल निशंक से हारे।
धनौल्टी - कांग्रेस ने मनमोहन सिंह को टिकट दिया तो दावेदार जोत सिंह बिष्ट बागी हो गए। जोत सिंह ने निर्दलीय10261 मत हासिल किये जबकि मनमोहन को 10933 मत मिले और भाजपा के महावीर रांगड़ मात्र 12081 वोट लेकर जीत गए।
बीएचईएल रानीपुर - कांग्रेस के मजबूत दावेदार अम्बरीश कुमार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय उतरे और 19791 मत हासिल दूसरे स्थान पर रहे। यहां भाजपा के आदेश चौहान 26340 मत लेकर जीते।
सहसपुर - कांग्रेस के बागी गुलजार अहमद ने 9699 मत हासिल कर पार्टी प्रत्याशी आयेंद्र की हार सुनिश्चित की। आयेंद्र को 20574 मत मिले, जबकि भाजपा के सहदेव पुंडीर 26064 मत लेकर विजयी हुए।
वर्ष 2012 में बगावत का असर
यमकेश्वर - कांग्रेस ने सरोजनी कैंतुरा को टिकट दिया तो दूसरी दावेदार रेणु बिष्ट यूआरएम से उतरी। कैंतुरा और रेणु की लड़ाई में भाजपा की विजया बड़थ्वाल 13842 मत हासिल कर जीती। कैंतुरा को 10301 मत मिले जबकि बिष्ट को 8541 मत मिले।
कर्णप्रयाग - भाजपा ने अनिल नौटियाल का टिकट काट कर हरीश पुजारी को टिकट दिया। जिससे कांग्रेस के अनसुया प्रसाद मैखुरी 11147 मत हासिल कर जीत गए। अनिल नौटियाल बतौर निर्दलीय साढ़े छह हजार वोट ले गए थे।
मसूरी - जोत सिंह गुनसोला को कांग्रेस से टिकट मिलने पर गोदावरी थापली निर्दलीय उतर आई। जोत सिंह को 18321, गोदावरी को 9248 जबकि भाजपा प्रत्याशी गणेश जोशी 28097 मत लेकर जीत गए।
बद्रीनाथ - यहां भाजपा प्रत्याशी प्रेमबल्लभ भट्ट को 10 हजार मतों से मिली हार में यूआरएम प्रत्याशी विधायक केदर सिंह फोनिया अहम रहे। फोनिया ने इस सीट को 2007 में भाजपा के टिकट पर जीता था, लेकिन टिकट कटते ही वह यूआरएम से उतरे।