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अपने स्कूल पहुंचे सेना प्रमुख बिपिन तो शिक्षकों ने खोल दिए उनके 'राज', पढ़ने के लिए क्लिक करें...

Sun, 10 Sep 2017 03:38 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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genral bipin rawat in dehradun
सेना प्रमुख बिपिन रावत जब देहरादून स्थित अपने स्कूल में पहुंचे तो उनके शिक्षकों ने स्कूल टाइम के उनके सारे 'राज' खोल दिए। 'देश के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत स्कूल के दिनों से ही अनुशासित थे। वह क्लास में हमेशा फर्स्ट आते थे। कई बार जरूरतमंद बच्चों को अपना टिफिन बांट देते थे। इस बात को मिस करता हूं कि बिपिन को कभी डांट नहीं पाया।'
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bipin rawat - फोटो : amarujala
यह कहना है कि कैंब्रियन हॉल स्कूल में जनरल बिपिन रावत के अंग्रेजी शिक्षक रहे शांति स्वरूप का। उन्होंने स्कूल में वर्ष 1967 से वर्ष 1981 के बीच पढ़ाया है। उन्होंने बताया कि आज जब उनके शिष्य ने उनके पैर छुए तो वाकई गला भर आया। शिक्षक के तौर पर ऐसा सम्मान कभी सोचा न था।

 
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bipin rawat
कैंब्रियन हॉल स्कूल में सीनियर कॉर्डिनेटर के पद पर रहे अंग्रेजी शिक्षक शांति स्वरूप ने वर्ष 1967 से 1981 तक वह कैंब्रियन हॉल स्कूल में रहे। इस दौरान बिपिन भी उनसे पढ़े है। शांति स्वरूप ने बताया कि आज अचानक अपने सामने देश के थल सेनाध्यक्ष के तौर पर बिपिन को देखकर आंख भर आई। अपने शिक्षक होने पर गर्व का अनुभव हुआ। साथ ही वह दिन भी ताजा हो गए, जब बिपिन क्लास में पढ़ते थे।

 

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bipin rawat
वह बचपन से ही बेहद अनुशासित थे। कभी किसी से झगड़ा नहीं करते थे। बेहद शांत स्वभाव के थे। क्लास में 80 से 90 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों के बीच में रहते थे। 86 वर्षीय शिक्षक शांतिस्वरूप ने बताया कि कई बार बिपिन उन छात्रों को अपना टिफिन दे दिया करते थे, जिन बच्चों के पास लंच नहीं होता था।

 
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bipin rawat
उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि मुझे इस बात का रंज है कि कभी बिपिन को डांट नहीं पाया। क्योंकि उसने कभी डांटने का मौका ही नहीं दिया। जनरल रावत की एक और टीचर बटलर वाइट भी समारोह में शामिल होनी थी लेकिन किसी वजह से नहीं आ पाई। वह क्लास में हमेशा फर्स्ट आते थे।

 
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genral bipin rawat in dehradun
समारोह का पहला चरण संपन्न होने के बाद जनरल बिपिन रावत अपने सभी साथियों और शिक्षकों से मिलने नीचे पंडाल में पहुंचे। उन्होंने समारोह में बैठे पूर्व सीएम एवं हरिद्वार सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक से गले मिलकर भेंट की। इसके बाद अपने शिक्षक शांति स्वरूप के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उन्हें शॉल ओढ़ाया। देश के आर्मी चीफ के यह संस्कार देखकर सबने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।
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