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Uttarakhand: एक महिला टीचर की कहानी, जिसने बच्चों के सपनों को उड़ान देने के लिए उठाया ये बीड़ा

Wed, 16 Nov 2022 03:29 PM IST
रेनू सकलानी बसंत कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
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बच्चों को पढ़ाती शिक्षिका - फोटो : अमर उजाला
आमतौर से सरकारी स्कूलों के शिक्षिकों को लेकर आम लोगों की शिकायत होती है कि वह स्कूल नहीं आते या फिर देर से पहुंचते हैं। आते हैं तो बच्चों को पढ़ाने को लेकर गंभीर नहीं होते। दूसरी तरफ बहादराबाद विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय राजपुर की शिक्षिका रितु शर्मा बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल लगने के तय समय से एक घंटे पहले पहुंच जाती हैं।

शिक्षिका का कहना है बच्चे कोरोनाकाल में घर पर रहने के कारण पढ़ाई में बहुत पिछड़ गए। इसलिए उनको अतिरिक्त कक्षा लगाकर पढ़ाना पड़ रहा है। बहादराबाद विकासखंड क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय राजपुर में तैनात शिक्षिका रितु शर्मा शिवालिक की रहने वाली हैं। जिससे वह रोजाना करीब 12 किलोमीटर दूर राजपुर सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए जाती हैं।

उन्होंने देखा कि स्कूल के बच्चे कोविड संक्रमण काल में पढ़ाई में बहुत पिछड़े हैं। जिससे उनका कक्षा के हिसाब से शिक्षा का स्तर काफी गिरा है।  इसलिए उन्होंने बच्चों के पहले की तरह पढ़ाई लिखाई में लाने के लिए एक्ट्रा क्लास लेने की योजना बनाई।
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शिक्षिका रितु शर्मा बच्चों को पढ़ाती। - फोटो : अमर उजाला
गर्मियों के समय में स्कूल जल्द खुलने के कारण वह अपने स्कूल से अतिरिक्त समय को बच्चों को नहीं दे पाई। क्योंकि उस समय स्कूल खुलने का समय सुबह साढ़े सात बजे का रहता है और इससे पहले घर से आकर अतिरिक्त क्लास लेना संभव नहीं हो सका। पर जब शरदकालीन समय परिवर्तन होने से स्कूलों के खुलने का टाइम 9:15 का हुआ तो शिक्षिका रितु ने भी अपना प्लान धरातल पर उतार दिया।वह स्कूल में बच्चों को एक्सट्रा क्लास लेने के लिए सुबह 8:15 बजे पहुंचने लगी।
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शिक्षिका रितु शर्मा शिक्षिका रितु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
सवा नौ बजे तक बच्चों को पढ़ाने के बाद रितु स्कूल में सामान्य अध्यापकों की तरह शिक्षण कार्य में जुट जाती हैं। इससे वह करीब एक माह से कक्षा दो और कक्षा चार के बच्चों को हर सुबह एक्स्ट्रा क्लास में हिंदी और गणित की अतिरिक्त शिक्षा देकर उनके सपनों को उड़ान देने के लिए लगी हुई हैं। 

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शिक्षिका - फोटो : अमर उजाला
वह बच्चों को उनकी कक्षा के पाठ्यक्रम के अलावा अन्य सामान्य ज्ञान के बारे में भी बच्चों को बच्चों को पढ़ा रही हैं। जिसमें वह हर रोज एक्स्ट्रा क्लास में होने वाली पढ़ाई के साथ-साथ, जनरल नॉलेज, प्रकृति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां बच्चों को दे रही हैं। जिससे बच्चे किताबी ज्ञान के साथ ही अन्य चीजों को जान और समझ सकें। 

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teacher - फोटो : अमर उजाला
अर्द्धवार्षिक से पहले बच्चों के टेस्ट लेने के दौरान देखा कि वह कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। जिससे बच्चों के अभिभावकों से बात की गई। अभिभावक बच्चों को स्कूल से एक घंटा पहले भेजने के लिए सहमत हुए तो अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के साथ एक्स्ट्रा कक्षाएं लेनी शुरू कर दी गई। उन्हें अर्द्धवार्षिक  के तैयार किया गया। अब उनमें कुछ सुधार हो रहा है। जब तक अभिभावक अपने बच्चों को एक्स्ट्रा क्लास में भेजते रहेंगे। वह उन्हें पढ़ाती रहेंगी। 
- रितु शर्मा, सहायक अध्यापक, राजपुर 
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