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अर्द्धवार्षिक से पहले बच्चों के टेस्ट लेने के दौरान देखा कि वह कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। जिससे बच्चों के अभिभावकों से बात की गई। अभिभावक बच्चों को स्कूल से एक घंटा पहले भेजने के लिए सहमत हुए तो अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के साथ एक्स्ट्रा कक्षाएं लेनी शुरू कर दी गई। उन्हें अर्द्धवार्षिक के तैयार किया गया। अब उनमें कुछ सुधार हो रहा है। जब तक अभिभावक अपने बच्चों को एक्स्ट्रा क्लास में भेजते रहेंगे। वह उन्हें पढ़ाती रहेंगी।
- रितु शर्मा, सहायक अध्यापक, राजपुर