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PICS: इस टीचर ने एक साल में बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर

Tue, 08 Dec 2015 03:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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ऋषिकेश में बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए जिस राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुथ्या से कई अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला निरस्त कराकर शहरी क्षेत्रों में पलायन की तैयारी कर रहे थे, उस अति दुर्गम श्रेणी के स्कूल में अपनी पहली इनिंग के महज एक साल में सहायक अध्यापक प्रमोद चमोली ने कायाकल्प करके रख दिया।
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अब इस विद्यालय में अपने बच्चों के एडमिशन के लिए दूर के गांवों के लोगों में होड़ लगी है। वह अपने गांव के सरकारी और अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों को छोड़कर बच्चों का दाखिला यहां कराने लगे हैं। सहायक अध्यापक प्रमोद चमोली ने अति दुर्गम श्रेणी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुथ्या, दोगी में अगस्त-2013 में पहली ज्वाइनिंग ली। (पहले कुछ ऐसी थी स्‍कूल की हालत)
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शिक्षक बताते हैं कि उन्हें खराब विद्यालय भवन, भौतिक संसाधन का अभाव और बच्चों का न्यूनतम शैक्षिक स्तर विरासत में मिला। अति दुर्गम इस एकल विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए महज तीन चटाइयां थी। पेयजल संसाधन नहीं होने से बच्चों को प्यास बुझाने के लिए स्कूल से करीब दो किमी दूर स्थित प्राकृतिक जलस्रोत तक ढालदार और खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता तय करना पड़ता था। उन्होंने इसे आदर्श विद्यालय बनाने की ठान ली।

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निजी संसाधनों से की गई पहल सतत प्रयासों से आज दोगी पट्टी के लिए ही नहीं बल्कि समूचे टिहरी जिले के लिए नजीर बन गई है। भौतिक संसाधनों के अलावा पठन-पाठन के स्तर की बात करें तो अब इस विद्यालय में होने वाली सुबह की प्रार्थना सभा से लेकर आखिरी वादन तक की तमाम शैक्षणिक गतिविधियां कान्वेंट कांसेप्ट पर होती हैं। विद्यालय को सरकार द्वारा संचालित प्रोजेक्ट अंग्रेजी में शामिल कर दिया गया है।
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प्राथमिक विद्यालय कुथ्या के सहायक अध्यापक प्रमोद ने जब स्कूल को सजाने संवारने की ठानी तो उन्होंने इसके शुरुआती दिनों में शिक्षा विभाग और अन्य स्वयंसेवी संगठनों से सहयोग की अपील की। मगर उन्हें प्रोत्साहन भी नहीं मिला। उन्होंने डेढ़ महीने की सैलरी से कार्य शुरू किया। जिससे उन्होंने विद्यालय की मरम्मत, रंगाई पुताई आदि सुंदरीकरण कार्य, बच्चों के लिए फर्नीचर, आई कार्ड, जुराबें, रिबन, टाई-बेल्ट आदि उपलब्ध कराए। (स्टोरीः हेमवती नंदन भट्ट)
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