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पिता टैक्सी चलाकर करते हैं परिवार का गुजारा, बेटी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा 

Fri, 17 May 2019 10:24 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड की सोरघाटी (पिथौरागढ़) की बेटी शीतल ने बृहस्पतिवार को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को फतह कर जिले के साथ ही उत्तराखंड और देश का नाम रोशन किया है। शीतल एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखतीं हैं। शीतल के पिता उमाशंकर टैक्सी चलाकर परिवार का भरणपोषण करते हैं। 
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल का घर - फोटो : अमर उजाला
शीतल के पिता उमाशंकर टैक्सी चलाकर आज भी अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। पहले जहां वह दिहाड़ी पर दूसरे की टैक्सी चलाते थे, अब खुद की टैक्सी चलाते हैं। अमर उजाला से बातचीत में उमाशंकर ने बताया कि पैतृक मकान में ही इस साल एक कमरा बनाया है, जिसमें शीतल के साहसिक अभियानों की फोटो लगी हैं। 
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल के माता पिता - फोटो : अमर उजाला
शीतल का छोटा भाई योगराज (31) देहरादून से बीएचएम का कोर्स कर रहा है। उससे छोटा भाई गौरव राज (18) दिल्ली में डांसिंग का कोर्स कर रहा है। शीतल की माता सपना देवी का मायका धारचूला के दारमा घाटी के दुर्गम गांव में है। 

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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल के परिजन - फोटो : अमर उजाला
बृहस्पतिवार को शीतल के घर में उल्लास का वातावरण था। शीतल के पिता उमाशंकर, मां सपना देवी घर में बधाई देने के लिए आ रहे लोगों का मुंह मीठा कर रहीं थीं। शीतल के नाना धनी राम ग्वाल, नानी मुन्नी देवी भी सल्मोड़ा बेटी के घर आए हुए हैं। नातिन शीतल की उपलब्धि पर नाना, नानी भी फूले नहीं समा रहे थे। 
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल - फोटो : अमर उजाला
शीतल ने नेपाल के दक्षिणी छोर से चढ़ाई कर बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे माउंट एवरेस्ट में भारतीय ध्वज फहराया। शीतल से पहले पिथौरागढ़ जिले के लवराज धर्मशक्तू सात बार माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके हैं। इस जिले के मोहन सिंह गुंज्याल, योगेश गर्ब्याल, सुमन कुटियाल दताल, रतन सिंह सोनाल, कविता बुढ़ाथोकी एवरेस्ट की चोटी को फतह कर चुकी हैं। 
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल - फोटो : अमर उजाला
शीतल बुधवार की रात 9 बजे 8000 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-4 से एवरेस्ट की चोटी के लिए निकली थीं। बृहस्पतिवार सुबह 6 बजे उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर विजय पा ली। शीतल बीते एक मई को दिल्ली से एवरेस्ट अभियान पर निकली थीं। वह 5 मई को एवरेस्ट के बेस कैंप को रवाना हुईं। 
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल - फोटो : अमर उजाला
15 मई तक बेस कैंप में क्लाइंबिंग का अभ्यास किया। 13 मई को शीतल 6300 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-2, 14 मई को 7400 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-3 और 15 मई को 8000 मीटर की ऊंचाई में स्थित कैंप-4 पहुंचीं। इसी दिन रात 9 बजे एवरेस्ट फतह के लिए निकल गईं थी। शीतल के कोच योगेश गर्ब्याल ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह 6 बजे शीतल ने एवरेस्ट फतह कर ली। 
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एवरेस्ट फतह करने वालीं शीतल - फोटो : अमर उजाला
वह कैंप-4 वापस लौट आईं हैं। 7 बार के एवरेस्ट विजेता लवराज धर्मशक्तू, नंदा देवी चोटी को फतह करने वाली विश्व की पहली महिला चंद्रप्रभा ऐतवाल को आदर्श मानने वाली शीतल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता सपना देवी को देती हैं, जिन्होंने विषम परिस्थिति में उनका साथ दिया। 
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