जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए राकेश चंद्र की अंतिम यात्रा में पहुंचे हर इंसान की आंख भीगी दिखी। बुधवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद राकेश की अंतिम यात्रा निकली। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने शहीद राकेश को श्रद्धांजलि दी और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की। इस दौरान पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।
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martyr rakesh raturi
इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। भीड़ इतनी थी कि पैर रखने तक की जगह नहीं हुई। नम आखों से लोगों ने राकेश को श्रद्धाजंलि दी। इससे पहले जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए राकेश चंद्र का पार्थिव शरीर मंगलवार को देर अपराह्न जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लाया गया। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सेना के जवानों ने शहीद को सलामी दी।
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जम्मू कश्मीर में महार रेंजीमेंट में हवलदार राकेश चंद्र शहीद हो गए थे। राकेश का पार्थिव शरीर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर देर अपराहन चार बजे के आसपास पहुंचा। शहीद राकेश चंद्र पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले थे। मंगलवार को एयरपोर्ट पर सेना के जवानों ने सलामी दी। इस दौरान ब्रिगेडियर जीवीएस रेड्डी मौजूद रहे थे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार सांसद डा रमेश पोखरियाल निशंक, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा धन सिंह रावत, मसूरी विधायक गणेश जोशी, कैंट विधायक विनोद चमोली, सहसपुर विधायक सहदेव पुंडीर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, उपाध्याक्ष सूर्यकांत धस्माना, भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, सुनील उनियाल गामा, जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन, एसएसपी निवेदिता कुकरेती समेत सब एरिया के अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शव यात्रा हरिद्वार के लिए निकाली गई। दोपहर में हरिद्वार के खड़खड़ी घाट में शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।
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जम्मू स्थित सुंजवां सैन्य कैंप में फिदायीन हमले में शहीद हुए हवलदार राकेश चंद्र रतूड़ी देहरादून स्थित कृष्णा विहार, बड़ोवाला के रहने वाले थे। राकेश 22 फरवरी को भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दून आने वाले थे, लेकिन उनके आने से आठ दिन पहले उनकी शहादत की खबर आ गई। परिवार में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। राकेश हर दिन फोन करके शादी के लिए हो रही खरीदारी की जानकारी लेते थे। राकेश चंद्र रतूड़ी बेहद मिलनसार और खुशमिजाज थे। वे 22 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे।
परिजनों का कहना है कि तीन दिन से उनका कोई फोन नहीं आया था, इससे परिजन चिंता में भी थे। आखिर सोमवार को अचानक राकेश के जम्मू के सुंजवां में फिदायीन हमले में शहीद होने की खबर आ गई। हमले के बाद चले सेना के सबसे लंबे सर्च ऑपरेशन के दौरान हवलदार राकेश का शव मिला। यह खबर सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी और बच्चे अवाक रह गए। परिजनों और नाते-रिश्तेदारों में शादी की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं।