देश तीन दिन बाद अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। दुर्भाग्य की बात ये है कि जिनकी बदौलत हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं, आने वाली पीढ़ी उनसे अंजान है।
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baahubali
- फोटो : twitter
इसकी बानगी सरकारी स्कूलों में देखने को मिलती है। जहां जूनियर कक्षा के छात्र छात्राएं बाहुबली, सुल्तान जैसे फिल्मी पात्रों और उनके कलाकारों को तो बखूबी जानते हैं, मगर अधिकांश को ये नहीं मालूम कि देश का पहला प्रधानमंत्री कौन था। इसमें सारा दोष छात्रों का नहीं है, बल्कि हमारा सिस्टम इस अंधकार के लिए ज्यादा जिम्मेदार है।
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tibri junior high school
- फोटो : AmarUjala
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्रता दिवस पर लगभग हर स्कूल में तिरंगा फहराकर सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए जाते हैं। औपचारिक रूप से स्वतंत्रता आंदोलन की जानकारी भी दी जाती है। लेकिन आम दिनों में छात्र देश के महापुरुषों के बारे में कितना जानते हैं, इसके लिए 'अमर उजाला' ने टिबड़ी जूनियर हाईस्कूल का मुआयना किया।
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nehru
- फोटो : AmarUjala
यहां छात्रों से जब सवाल किए तो जवाब चौंकाने वाले थे। सबसे पहले बच्चों से पूछा गया कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है। काफी विचार मंथन के बाद इस प्रश्न का जवाब सिर्फ एक बालिका ही दे पाई। देश के पहले प्रधानमंत्री का नाम पूछा गया तो दो छात्राओं ने बड़ी हिम्मत कर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का नाम बताया।
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हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
एक छात्र ने लाल बहादुर शास्त्री को पहला प्रधानमंत्री बताया तो एक छात्र ने उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी का नाम लिया। उत्तराखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री का नाम भी छात्रों को नहीं पता था। सिर्फ एक छात्र ही मौजूदा सीएम का नाम बता पाया।
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सुल्तान
- फोटो : bollywoodlife.com
कुछ और सवाल करने के बाद जब छात्र छात्राओं से यह पूछा गया कि वह सुल्तान को जानते हैं तो सभी चहक उठे और जवाब देने के लिए एक साथ हाथ उठाया। उन्होंने सुल्तान फिल्म की हीरोइन तक का नाम बिना पूछे बताया। कुछ बच्चे अपने खुद के दादा नाना के नाम से अनभिज्ञ रहे मगर बाहुबली से लेकर ऋतिक रोशन, अभिषेक बच्चन के पिता तक का नाम बता डाला।
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स्वतंत्रता उत्सव
राजकीय जूनियर स्कूल जिले और प्रदेश के बाकी सरकारी स्कूलों की बानगी भर है। ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों का हाल भी ज्यादा बेहतर नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इन हालात में जब देश का भविष्य ही अपने गौरवशाली इतिहास से वाकिफ नहीं है राष्ट्रीय पर्वों पर झंडा फहराकर मिठाई खाने के अलावा और क्या मायने समझे जा सकते हैं।
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मदन कौशिक
- फोटो : file photo
विधायक मदन कौशिक को जानते हैं सारे बच्चे
स्कूल में किसी भी बच्चे को यह तो नहीं मालूम कि सांसद, विधायक और मेयर कौन हैं, मगर जब पूछा गया कि मदन कौशिक का नाम सुना है तो एक साथ सभी बच्चों ने हाथ उठाया दिया। बच्चों से जब यह पूछा गया कि मदन कौशिक कौन है तो एक बालक उठा और बोला कि अध्यक्ष हैं। इससे आगे वह नहीं बता पाया।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ताविहीन होने का सबसे बड़ा कारण संसाधनों की कमी है। टिबड़ी जूनियर स्कूल में छह से आठवीं तक के 76 छात्र छात्राएं दो शिक्षिकाओं के भरोस है। प्रभारी प्रधानाचार्य दीपा रानी अग्रवाल खुद सामाजिक विषय की शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि छात्र छात्राओं को अक्सर देश की आजादी व महापुरुषों की जानकारी दी जाती है, पर छह से आठवीं तक के छात्र छात्राओं को दोनों शिक्षिकाएं ही सारे विषय पढ़ाती हैं। दूसरी शिक्षिका आर्षेयी शर्मा का भी जल्द तबादला होने वाला है, तब केवल प्रभारी प्रधानाचार्य ही स्कूल में रह जाएगी।