विश्व को ब्रह्मांड उत्पत्ति का बिग बैंग सिद्धांत देने वाला अंतरिक्ष का चितेरा स्टीफन विलियम हॉकिंग सितारों की दुनिया में खो गया। इससे विज्ञानियों में शोक की लहर दौड़ गई।
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Stephen Hawking
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हॉकिंग के योगदान को याद करके विज्ञानियों की आंखें भर आईं। यूसर्क के निदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि हॉकिंग ने अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद दुनिया को भौतिकी और ब्रह्मांड शास्त्र के क्षेत्र में नई दृष्टि दी है। ब्लैक होल्स के रहस्य से पर्दे हटाने वाला दुनिया को अनोखा सिद्धांत दिया है।
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श्रद्धांजलि सभा में डॉ. पंत ने बताया कि स्टीफन हॉकिंग मोटर न्यूरॉन बीमारी की चपेट में आ गए। इससे गर्दन के नीचे उनका पूरा शरीर पैरालाइज हो गया। इसके बावजूद उन्होंने ब्रह्मांड शास्त्र और भौतिकी के क्षेत्र में संसार को नई दृष्टि दी है। वह कैंब्रिज विश्वविद्यालय (ब्रिटेन) के सैद्धांतिक ब्रह्मांड शास्त्र केंद्र के निदेशक रहे हैं।
हॉकिंग की विश्व विख्यात पुस्तकों में ब्रह्मांड की रचना से संबंधित ‘दि ग्रैंड डिजाइन’, ‘ब्लैक होल्स एंड बेबी यूनिवर्स’, ‘जॉर्जस सीक्रेट की टू यूनिवर्स’, ‘दि यूनिवर्स इन नट शेल’, ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री आफ टाइम’ आदि हैं। जो कई रहस्यों से पर्दा उठातीं हैं, जिसने भी यह किताबें पढ़ी अद्भुत सच से आत्मसात हुआ।