भाई बहन के प्यार के त्योहार की कई कहानियां हैं पर साहित्य की दुनियां की दो महान हस्तियां भी हैं जिनकी राखी की कहानियां मशहूर हैं।
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ऐसे निराले थे भैया निराला और दीदी महादेवी, दुर्लभ तस्वीरें
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हम बात कर रहे हैं सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और महादेवी वर्मा के बीच बने हुए भाई-बहन के रिश्ते की।
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ऐसे निराले थे भैया निराला और दीदी महादेवी, दुर्लभ तस्वीरें
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नैनीताल के हिल स्टेशन रामगढ़ में महादेवी वर्मा सृजन पीठ की स्थापना में प्रमुख योगदान देने वाले प्रोफेसर लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ बताते हैं कि महादेवी रामगढ़ में 1937 से 1965 तक लगातार गर्मियों में आती रहीं।
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यहीं रहकर उन्होंने अतीत के चलचित्र, कविता संग्रह दीपशिक्षा समेत कई रचनाएं लिखी थीं। हालांकि वह ज्यादातर रक्षाबंधन इलाहाबाद में ही मनाती थीं।
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साहित्य जगत में वह अकेली बहन थीं, जिन्होंने भाई-बहन के रिश्तों की डोर को स्नेह से सींच कर अटूट बनाया था।
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एक बार जब राखी बंधवाने निराला जी महादेवी के घर पर पहुंचे तो उनसे 12 रुपये मांग लिए। बाद में 2 रुपये रिक्शे वाले को दिए और दस रुपया देते हुए कहा दीदी ये राखी बंधाई का गिफ्ट है।