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नेहा सक्सेना: पीसीओ बूथ से लेकर ज्वेलरी शॉप तक में किया काम...और आज बन गई साउथ इंडस्ट्री का बड़ा नाम

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नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
उत्तर की बेटी नेहा सक्सेना आज दक्षिण का जाना-पहचाना नाम है। देहरादून की नेहा अपनी मेहनत और लगन से साउथ फिल्म इंडस्ट्री के आसमान में चमक बिखेर रही हैं। पर, देहरादून की गलियों से निकलकर एक अनजान इंडस्ट्री में अपनी जगह बना पाना नेहा के लिए आसान नहीं था।

कठिन डगर पर चलकर बुलंद हौसलों से नेहा ने यह मुकाम हासिल किया, जहां उनकी मां हमेशा ढाल बनकर साथ खड़ी रहीं। दक्षिण भारतीय फिल्मों की जानी-पहचानी अभिनेत्री नेहा सक्सेना की कहानी हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर अभिनय कि दुनिया में नाम कमाना चाहती हैं।

साउथ इंडस्ट्री में 12 साल कर चुकीं पूरे 
नेहा आज दक्षिण भारतीय फिल्मों के बड़े-बड़े अभिनेताओं और निर्देशकों के साथ काम कर रही हैं। दून फिल्म फेस्टिवल में पहुंची नेहा कहती हैं कि मुझे शुरू से एक अभिनेत्री बनना था। जिस दिन 
मैंने अपनी मां को यह इच्छा बताई तो वह डर गईं। उनके मन में कुछ हिचकिचाहट थी।

नेहा के सिर से पिता का साया काफी पहले ही उठ गया था। ऐसे में मां ने ही अकेले नेहा को पाला। फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने की इजाजत देना मां के लिए आसान नहीं था, लेकिन बेटी को  उड़ान भरने से रोकना भी नहीं चाहती थी। वह खुद बेटी की ढाल बनीं। अपने शानदार करियर के साथ नेहा इस इंडस्ट्री में 12 साल पूरे कर चुकी हैं।
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नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
बकौल नेहा, मेरा बचपन काफी मुश्किलों भरा रहा। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि स्कूल फीस तक देना मुश्किल था। पर मैं पढ़ाई में अच्छी थी, इसलिए स्कूल ने मेरी फीस माफ कर दी थी। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए मैंने लोन लिया। बहुत कम उम्र से पढ़ाई के साथ कमाना शुरू किया। 
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नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
पीसीओ बूथ से लेकर ज्वेलरी शॉप तक में मैंने काम किया। नेहा ने बताया कि अपनी जिम्मेदारी और सपने में सामंजस्य बनाते हुए मैंने सबसे पहले मां को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाया। सारे लोन चुकाए। इसके बाद ही अपने सपने को साकार करने के लिए साउथ इंडस्ट्री का रुख किया। यहीं से मेरा एक और संघर्ष शुरू हुआ। उत्तर की लड़की के लिए दक्षिण में जगह बना पाना मुश्किल था।

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नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
वहां की भाषा मुझे नहीं आती थी, इसलिए ऑडिशन में कई बार बाहर हो गई। कई बार मौके पाने के लिए डिमांड भी की जाती थीं, लेकिन खुद पर विश्वास था। सोचा था यदि कुछ बनना है तो सही रास्ते पर चलकर बनूंगी।  नेहा बताती हैं कि एक फैशन शो के दौरान निर्देशक को मेरे बाल पसंद आए और यहीं से मुझे अपनी 2013 में अपनी पहली तुलु फिल्म "रिक्शा ड्राइवर" मिली।
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दून फिल्म फेस्टिवल में पहुंची साउथ की फेमस एक्ट्रेस नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
खास बात ये थी कि ये फिल्म मेरे बेहद चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि अपनी पहली फिल्म में हर एक्ट्रेस खूबसूरत दिखना चाहती है, लेकिन मैं एक एसिड पीड़ित थी। अपनी पहली फिल्म के लिए मुझे 11 अवार्ड मिले। और इस फिल्म के बाद प्रोजेक्ट की बारिश होने लगी। कन्नड़, तमिल और तेलगू की कई फिल्में मैंने साइन की। अभिनेता सैफ अली खान के साथ भी नेहा ने एक बालीवुड  फिल्म की। और जल्द ही वह अब बॉलीवुड में एक और फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाएगी। 
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नेहा सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
नेहा कहती हैं कि दक्षिण भारतीय फिल्मों में मुझे बहुत सम्मान मिला है। वहां के लोगों ने मुझे स्वीकार किया और शायद यही कारण था कि उन्होंने साउथ एडाप्टेड डॉटर का टाइटल भी दिया। नेहा ने स्टार सुवर्णा पर प्रसारित पौराणिक कन्नड़ श्रृंखला "हर-हर महादेवा" में मंदाकिनी से छोटे पर्दे में शुरुआत की। इसके बाद लाल सलाम में डांसर मलयालम रियलिटी शो डेअर द फेयर में भी काम किया। नेहा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कन्नड़, तमिल, तेलगु, मलयालम और तुलु भाषा में बात कर लेती हैं।
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नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
नेहा का कहना कि यदि उन्हें मौका मिला तो वह उत्तराखंड की स्थानीय भाषाओं में काम करना चाहेंगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गढ़वाली और कुमाऊंनी फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। अभिनेत्री नेहा सक्सेना का कहना है कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री में कंटेंट को काफी प्राथमिकता दी जाती है। वह अपनी संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता हैं। 

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नेहा सक्सेना - फोटो : amar ujala
एक उत्तराखंडी होने के नाते मैं चाहती हूं कि मैं यहां के लिए कुछ करूं। यहां की फिल्म एसोसिएशन के साथ यहां की संस्कृति को बढ़ावा दूं। उत्तराखंड का टैलेंट बाहर जाकर काम कर रहा है, लेकिन यहां हम उन्हें अवसर नहीं दे पा रहे हैं। जिसे बढ़ावा देने की आवश्यकता है। यहां की भाषा, बोली, संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
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