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उत्तराखंड: बर्फ, धूप, ओलावृष्टि, पल-पल बदला मौसम, 10 तस्वीरों में जन्नत सा नजारा

Sat, 26 Jan 2019 08:29 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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snowfall - फोटो : अमर उजाला
अनवरत बारिश के बाद हुए हिमपात से राज्यभर में शीतलहर का प्रकोप है। शुक्रवार को अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ में जमकर बर्फबारी हुई। बर्फबारी के चलते पिछले पांच दिन से थल-मुनस्यारी सड़क बंद है। चार दिन से बिजली आपूर्ति ठप है। वहीं खराब मौसम के कारण शुक्रवार को नैनीसैनी से सभी उड़ानें रद्द कर दी गई। उड़ानों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को निराशा का सामना करना पड़ा। कपकोट में सड़के बंद होने के कारण चार दर्जन से अधिक छोटे-बड़े वाहन फंसे हुए हैं। 
 
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snowfall
तेज बारिश और ओलावृष्टि से दून में पारा एक बार फिर गिर गया है। शुक्रवार शाम करीब एक घंटे तक हुई बारिश के बाद ज्यादातर इलाकों में ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग ने आज भी कुछ इलाकों में हल्की बारिश का अनुमान जताया है। शुक्रवार सुबह से ही राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रहे। दोपहर बाद काले बादल छाने और हल्की हवा भी चलने लगी। शाम करीब चार बजे एकाएक तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ देर तेज बारिश के बाद ओले भी गिरने लगे। करीब चार से पांच मिनट तक लगातार ओलावृष्टि हुई। मोथरोवाला, बंजारावाला, कारगी क्षेत्र में बड़े-बडे ओले गिरे। बारिश और ओलावृष्टि के चलते सड़कों पर एकाएक यातायात कम हो गया। विशेषकर दोपहिया वाहन चालक जहां-तहां खड़े होकर खुद को भीगने से बचाने का प्रयास करते दिखे। करीब डेढ़ घंटे तक ज्यादातर स्थानों पर अच्छी बारिश हुई। 

 
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मसूरी पल-पल बदलते मौसम के लिए भी जानी जाती है लेकिन शुक्रवार को तो मौसम ने कई रूप धारण किये। कभी बर्फ़बारी तो कुछ पलभर में खिली चटक धूप फिर ओलावृष्टि ने पर्यटकों को हर तरह का नजारा दिखाया। पर्यटकों ने भी यहां के मौसम का जमकर लुत्फ़ उठाया और हर पल को यादगार बनाने के लिए अपने कैमरों में कैदकर लिया। बीते सोमवार मसूरी व धनोल्टी में हुए भारी हिमपात के बाद शुक्रवार को सीजन का दूसरा भारी हिमपात हुआ। बारह बजे मौसम एकाएक साफ हो गया और चटक धूप खिलने लगी। इसके बाद एक बार फिर नगर के मौसम ने अचानक करवट बदली और करीब दो बजे भारी ओलावृष्टि शुरू होने लगी जो शाम तक जारी रही। सवा पांच बजे एक बार फिर नगर में बर्फ़बारी शुरू हुई। कैम्पटी हाईवे पर पाला और बर्फबारी के कारण वाइल्ड फ्लावर स्थित पालाग्रस्त क्षेत्र में एक वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। वाहन में मात्र चालक सवार था जो सुरक्षित है।
 

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पौड़ी जनपद में शुक्रवार को तीसरी बार बर्फबारी हुई। बर्फबारी से जहां सैलानी अटखेलियां करते नजर आए, वहीं इससे आम जनजीवन प्रभावित रहा। बारिश व बर्फबारी से 14 मोटर मार्गों पर आवाजाही ठप हो गई है। शुक्रवार को जनपद में सुबह से ही बारिश शुरू हो गई थी। जनपद के मांडाखाल, अद्वाणी, झंडीधार, फेडखाल, थलीसैंण, भरसार, जल्लू, चोरीखाल व दीवा सहित अन्य पहाड़ियां बर्फ से लकदक हो गईं। बारिश व बर्फबारी से देघाट-मरचुला मोटर मार्ग, भिक्यासैंण-देषाट-बछुवाबाण-मैहलचौरी, मरचुला-सराईखेत-बैंजरों-पोखड़ा-सतपुली मोटर मार्ग, मैठाणाघाट-ग्वीन रसिया महादेव मोटर मार्ग, थलीसैंण-फरस्यूडी-धांधणखेत मोटर मार्ग, थलीसैंण- चौरीखाल-चिपलघाट, दमदेवल-कलगड़ी-खिर्सू-पोखरी-खेड़ाखाल व मटेला-तल्ला-रणगेरा-बदाडू आदि मोटर मार्गों पर आवाजाही ठप है। बंद मोटर मार्गों को खोलने के लिए डोजरों की मदद ली गई। मांडाखाल-खिर्सू मोटर मार्ग पर जमी बर्फ को हटाकर सुबह ही यातायात सुचारू कर दिया गया, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रुक-रुक बारिश और बर्फबारी से सायं तक मार्गों पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही।  
 
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गैरसैंण के दीवालीखाल में हुई भारी बर्फबारी से नैनीताल हाइवे बंद हो गया है। पुलिस और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गैरसैंण और आदिबदरी में वाहनों को एक जगह रोक दिया है। तहसीलदार दर्शन लाल मैठाणी ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए अभी हाइवे पर यातायात बहाल नहीं हो सकता है। जंगलचट्टी और दीवालीखाल में बर्फ हटाने के लिए दो जेसीबी तैनात की हैं। वहीं देवाल में बृहस्पतिवार रात से लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी से लोहाजंग-वाण तथा घेस-हिमनी मोटर मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। पर्यटन स्थल भींकलताल और ब्रह्मताल रूट पर दो से तीन फिट तक हुई बर्फबारी से कलकत्ता और बंगलूरू से आए 32 सदस्यीय पर्यटकों का दल लोहाजंग में रुका हुआ है। घेस, हिमनी, बलाड़, लोहाजंग, मुंदोली, वांक, वाण, सौरीगाड़, रामपुर, दीदना, तोरती आदि गांवों में भी भारी बर्फबारी हो रही है।
 
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रुद्रप्रयाग जनपद में हुई लगातार बारिश व बर्फबारी से जिले में नौ मोटर मार्ग अवरुद्ध हो गए। संपर्क मार्गों के अवरुद्ध होने से दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।बीते तीन दिनों से जिले में लगातार हुई बारिश से जिले में जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से मयाली-घनसाली, पीड़ा-पाबौ, दुगड्डा-पालाकुराली, सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण, मक्कू-पल्द्वाडी, गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-जाल चौमासी, ताला-बरंगाली, बांसबाड़ा-मोहनखाल व रुद्रप्रयाग-पोखरी मोटरमार्ग अवरुद्ध हो गए। इस मोटर मार्गो से वाहनों की आवाजाही ठप पड़ी हुई है। मोटर मार्ग बंद होने से ग्रामीणों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। यदि मोटर मार्ग जल्द से जल्द नहीं खोले जाते है तो दूरस्थ क्षेत्रों में जरूरी वस्तुओं का संकट पैदा हो सकता है। 
 
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चकराता और लोखंडी में शुक्रवार को एक बार फिर हिमपात हुआ। सुबह छह बजे से दोपहर एक बजे तक हिमपात के चलते चकराता में तीन फीट और लोखंड़ी में चार फीट तक बर्फ जम गई है। बर्फबारी का इंतजार कर रहे पर्यटकों के क्षेत्र में पहुंचने से पूरा क्षेत्र पर्यटकों से गुलजार हो गया है। चकराता और आस पास के क्षेत्रों में सुबह जमकर बर्फबारी हुई। नगाई डांडा, चौलीडांडा, मागटी, ठाणाडांडा, लोखंडी, मुंडाली, कथियान, देववन, प्यूनल, डेरसा, भरम, कुनैन, लोहारी, बुधेर टॉप आदि क्षेत्र की ऊंची चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढ़क गई। बर्फबारी के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों का क्षेत्र में पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया है, लेकिन अधिक हिमपात के चलते छावनी गेट से आगे वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। पर्यटकों  को छावनी गेट पर वाहनों को खड़ा कर छावनी बाजार के लिए पैदल दूरी नापनी पड़ रही है।  

 एक दिन की राहत के बाद फिर बिगड़ा मौसम, 550 गांव बर्फ के आगोश में 

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गढ़वाल में एक दिन की राहत के बाद शुक्रवार को मौसम का मिजाज फिर बिगड़ गया। तड़के से निचले क्षेत्रों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई। पहाड़ के तीन जिलों में करीब 550 गांव बर्फ के आगोश में आ चुके हैं। केदारनाथ में बृहस्पतिवार शाम करीब पांच बजे से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शुक्रवार देर शाम तक भी नहीं थमा। वहां दस फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। उत्तरकाशी जिले में तीन सौ से अधिक गांव बर्फ से ढके हैं। यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत जिले के दो दर्जन संपर्क मोटर मार्ग अवरुद्ध होने से बड़ी आबादी का जिला एवं तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है। बिजली एवं दूरसंचार सेवाएं ठप पड़ने से ग्रामीणों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड के कारण पाइप फटने से घरों तक पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। बर्फबारी के कारण प्राकृतिक स्रोतों तक पहुंचने की स्थिति नहीं बनने से लोग बर्फ गलाकर पीने का पानी जुटाने को मजबूर हैं।
 

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चमोली जिले में करीब 200 गांव बर्फ में कैद हैं। बदरीनाथ हाईवे के साथ ही 14 संपर्क मार्ग अवरुद्ध पड़े हुए हैं। पोखरी क्षेत्र के मोहनखाल में पिछले पांच वर्षों का रिकार्ड टूट गया है। यहां करीब तीन फीट तक बर्फ जम गई है। बदरीनाथ धाम में लगभग पांच और हेमकुंड साहिब में छह फीट तक बर्फ जम गई है। फूलों की घाटी, होमकुंड, रुद्रनाथ, अनसूया मंदिर, कांचुलाखर्क, नंदा घुंघटी, द्रोणागिरी, सुरांईथोटा सहित जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हुई। रुद्रप्रयाग जिले में करीब पचास गांवों में बारिश और बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित हुआ है। केदारनाथ में 24 घंटे से भारी बर्फबारी हो रही है। यहां करीब दस फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है। शुक्रवार को दिनभर तापमान माइनस में रहा। द्वितीय केदार मद्महेश्वर, तृतीय केदार तुंगनाथ सहित निचले इलाकों गौंडार, तोषी, त्रियुगीनारायण सहित अन्य गांवों में भी तेज बर्फबारी हो रही है, जिससे आम जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है।
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चोपता से 66 पर्यटकों का रेस्क्यू कर ऊखीमठ पहुंचाया 

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snowfall/chopta
पुलिस और डीडीआरएफ द्वारा चोपता से 66 पर्यटकों को रेस्क्यू कर ऊखीमठ पहुंचा दिया गया है। अब, यहां कोई पर्यटक नहीं है। चोपता में 7 फीट और दुगलबिट्टा में 4 फीट बर्फ जम चुकी है। कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-हाईवे मस्तूरा से आगे बंद हो चुका है। एनएच निर्माण खंड लोनिवि की सहायक अभियंता वंदिता शुक्ला ने बताया कि तुंगनाथ घाटी में सुबह से देर शाम तक लगातार बर्फबारी होती रही। जिस कारण हाईवे नहीं खोला जा सका। चोपता में 7 फीट और दुगलबिट्टा में 4 फीट बर्फ जम चुकी है। यहां आवाजाही संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के बीच पुलिस व डीडीआरएफ की टीम द्वारा चोपता से 66 पर्यटकों को करीब 20 किमी पैदल चलकर मस्तूरा तक लाया गया। यहां से वे देर शाम को ऊखीमठ पहुंचा दिए गए हैं। चोपता क्षेत्र में कोई पर्यटक नहीं हैं। बताया कि आपदा कंट्रोल रूम को भी इस संबंध में सूचित कर दिया कि लगातार बर्फबारी से ताला से आगे किसी भी माध्यम से आवाजाही संभव नहीं है। दूसरी तरफ पर्यटक गांव में सारी और देवरियाताल में काफी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
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