डॉ. पंत के मुताबिक दीपावली के बाद दमा के मरीजों की संख्या 20 फीसदी तक बढ़ जाती है। मौसम जब भी तेजी से करवट लेता है, श्वांस नली और मांसपेशियों में जकड़न हो जाती है। बकौल डॉ. पंत दीपावली के बाद दमा के मरीज बाहर न निकले तभी बेहतर है। कारण कि अगले तीन-चार दिन वायु प्रदूषण इतना अधिक होगा कि बाहर निकलने वाले सामान्य लोग भी सांस सम्बंधी रोगों के शिकार हो सकते हैं। विशेष अवस्था में दमा रोगियों को बाहर निकलने से पहले मुंह-नाक पर पतला सूती कपड़ा बांध लेना चाहिए। जिन्हें थोड़ी भी शिकायत हो, उन्हें सुबह-शाम तलवे में मालिश करनी चाहिए।