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चारधाम यात्रा 2019: केदारनाथ यात्राकाल में इस बार हुआ चार अरब का व्यवसाय, पहुंचे रिकॉर्ड श्रद्धालु

Wed, 30 Oct 2019 08:52 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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- फोटो : एएनआई फाइल फोटो
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा कारोबार और रोजगार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रही है। यात्राकाल में 4 अरब से ज्यादा का कारोबार हुआ। साथ ही केदारघाटी के बाजारों से लेकर पैदल मार्ग और धाम में हजारों लोगों को रोजगार मिला। 
 
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9 मई से 29 अक्तूबर तक संचालित बाबा केदार की यात्रा में इस वर्ष उमड़े आस्था के सैलाब ने कारोबार को पंख लगाने में अहम भूमिका निभाई। पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन से करीब 55 करोड़  का करोबार हुआ है, जिससे प्रशासन को भी 5 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।
 
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दंडी, कंडी और पालकी से भी 20 लाख से अधिक का कारोबार हुआ। इसके अलावा केदारनाथ यात्रा में इस वर्ष 9 हेली कंपनियों द्वारा 76 करोड़ का व्यवसाय किया गया। वहीं, श्रीबदरीनाथ-मंदिर समिति को भी 19 करोड़ और गढ़वाल मंडल विकास निगम ने 7 करोड़ की आय अर्जित की है।
 

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रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक संचालित करीब एक हजार से अधिक होटल, लॉज, धर्मशाला ने इस यात्राकाल में 125 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है, जबकि ढाबा व छोटे दुकानदारों द्वारा 4 लाख से 25 लाख तक आय अर्जित की गई है। सोनप्रयाग में पहाड़ी किचन ने यात्राकाल में एक करोड़ की आय अर्जित की। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
केदारनाथ धाम की यात्रा में इस वर्ष रिकॉर्ड 9 लाख 97 हजार 585 श्रद्धालुओंं ने बाबा के दर्शन किए। यात्रा 9 मई को शुरू हुई थी, इस दौरान 6680 श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने थे। वर्ष 2012 से पूर्व तो कभी भी एक माह तो दूर, एक सीजन में भी इतने यात्री धाम नहीं पहुंचे थे। यहीं नहीं इस वर्ष यात्रा के 41वें दिन (21 जून) में ही बीते वर्ष पहुंचे 732240 श्रद्धालुओं का रिकार्ड टूट गया था।
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केदारनाथ यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं को प्रकृति से रूबरू होने का भरपूर मौका मिला है। 9 मई से 29 अक्तूबर तक श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर हिमखंडों के दर्शन हुए। इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक केदारनाथ में रिकार्ड बर्फबारी हुई थी। सर्दियों में कुल 60 फीट तक बर्फ गिरी, जिसके चलते धाम से लेकर गौरीकुंड तक पैदल मार्ग भी कई दिनों तक बर्फ से ढका रहा। 
 
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- फोटो : अमर उजाला
गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर चिरबासा से जंगलचट्टी के बीच 10 महिला समूहों द्वारा पहाड़ी भोजन व स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाए गए थे। यात्राकाल में करीब 20 लाख रुपये की आय हुई है। साथ ही 142 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1612 महिलाओं द्वार यात्रा के लिए स्थानीय उत्पादों से प्रसाद तैयार करने का काम भी किया गया, जिससे एक करोड़ 22 लाख से अधिक की आय हुई है।
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