टिहरी में स्कूल में पढ़ते बच्चे
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सवाल : अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताएं ?
- जी, मैं सिंपल फाउंडेशन के साथ काम कर रही हूं। हमारे तीन प्रोग्राम्स हैं, जो जिला प्रशासन के साथ मिलकर पांच प्राथमिक स्कूलों में चल रहे हैं। हमारा जोर मिक्स लर्निंग पर है। इन स्कूलों में पहली और दूसरी के बच्चे एक साथ और तीसरी से पांचवीं के बच्चे एक साथ बैठते हैं। हम लोग बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के साथ भी काम करते हैं। हमने शिक्षकों के लिए निपुण भारत के तहत प्रोग्राम्स बनाए हैं। उन्हें हम प्रैक्टिस कराते हैं। हमारा उद्देश्य है कि बच्चों को तीन तरीके से शिक्षा मिले। पहला, उनका शैक्षणिक स्तर अच्छा हो, दूसरा उनका सामाजिक और भावनात्मक विकास हो और तीसरा 21वीं सदी की स्किल्स के हिसाब से उनमें क्रिटिकल थिंकिंग विकसित हो। इसमें शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी का काफी सहयोग मिलता है।
सवाल : टिहरी में किस तरीके से परिणाम सामने आ रहे हैं ?
पहला तो यह है कि जो टीचर्स हैं, उनमें काफी खुलापन है। हम उनके साथ बहुत क्लोजली ग्राउंड पर काम करते हैं। हमने ये भी देखा है कि जब बच्चा अपने आसपास की चीजों को सोच पाता है और उसे विजुलाइज करता है तब उसकी लर्निंग ज्यादा मजबूत होती है। इससे काफी अच्छा रिस्पांस मिलता है। हम स्कूल के अंदर बच्चों के साथ भावनात्मक लगाव के लिए प्रैक्टिस करते हैं। हर दिन सुबह बच्चों से शिक्षक बात करते हैं कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं, उन्होंने आज क्या खाया। क्या आज वह ठीक से सो पाए या नहीं। क्या उसके घर में कोई समस्या तो नहीं। इस तरह की बातें बच्चों को प्रभावित करती हैं और उन्हें लगता है कि कोई उनकी भी सुन रहा है। ऐसे में अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।