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आज से शुरू हो रहे हैं पितृ पक्ष, यहां जानिए पितरों के श्राद्ध का उत्तम समय और विधि

Wed, 06 Sep 2017 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से पितरों का दिन प्रारंभ हो रहा है जो अमावस्या तिथि तक रहेगा। मंगलवार यानी आज से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं। 19 सितंबर को अमावस्या एवं चतुर्दशी का श्राद्ध होगा। जबकि अन्य श्राद्ध क्रम से ही होंगे। ज्योतिषों के अनुसार अपराह्न व्यापिनी तिथि में ही श्राद्ध करना चाहिए।
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धर्मकूप, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध पर तर्पण-अर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेंगे वंशज - फोटो : अमर उजाला
पितरों का पितृ पक्ष के साथ विशेष संबंध माना जाता है। श्राद्ध कर्म परलोक में सूक्ष्म शरीर धारी जीव की तृप्ति कराता है। माना जाता है कि श्राद्ध कर्म से पितर अन्न-जल से तृप्त होकर अपना शुभ आशीर्वाद देते हैं। पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल के अनुसार मंगलवार को पूर्णिमा का श्राद्ध कर सकते हैं। पूर्णिमा तिथि का आरंभ दिन में 12.30 मिनट पर होगा। 
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छह सितंबर को प्रतिपदा का श्राद्ध होगा। इस दिन प्रतिपदा तिथि दिन में 12.20 मिनट पर आरंभ होगी। 19 सितंबर को प्रात: 11.42 मिनट के पश्चात अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन चतुर्दशी एवं अमावस्या का श्राद्ध होगा। आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण अमावस्या (16 दिन) तक पितरों का तर्पण करना चाहिए। 

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जिस स्त्री का पुत्र न हो, वह स्वयं अपने पति का श्राद्ध कर सकती है। श्राद्ध तिथि पर जल, तिल, कुश, दूध, पुष्प अक्षत आदि का तर्पण किया जाता है। ब्राह्मूणों को भोजन, पंचबलि, गाय, कौआ, कुत्ता, अग्नि, चीटियों के लिए अन्न दिया जाता है। जिस दिन श्राद्ध की तिथि रहे उस दिन अपराह्न काल में ही श्राद्ध करें। 
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दिन में 1.12 मिनट से 3.36 मिनट तक अपराह्न काल होता है। इस दिन कुतुप बेला में अर्थात दिन का आठवां मुहूर्त प्रात: 11.36 मिनट से 12.24 मिनट तक का समय श्राद्ध के लिए उत्तम होता है। वर्षभर में कम से कम दो बार श्राद्ध करना अनिवार्य है। पितृ पक्ष में और मृत्यु तिथि पर। जिस दिन या तिथि पर मृत्यु होती है, उस पुण्य तिथि पर श्राद्ध करने का विधान है। 
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इसके अतिरिक्त अमावस्या संक्रांति आदि पर्व की तिथियों पर भी श्राद्ध किया जा सकता है। श्रद्धा भक्ति के साथ शास्त्रोक्त विधि से किया हुआ श्राद्ध ही सर्व प्रकार से कल्याण देता है। पितर अत्यंत दयालु होते हैं। वे अपनी संतान से तर्पण की आकांक्षा रखते हैं। माना जाता है कि श्राद्ध करने से पितरों को प्रसन्नता एवं संतुष्टि मिलती है।
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