रुकमा देवी और देवेश्वरी बिष्ट
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रुकमा ने जड़ी-बूटी की खेती को बनाया आजीविका का साधन
नंदानगर में वादुक गांव की 48 साल की रुकमा देवी 15 साल से जड़ी-बूटी की खेती कर स्वयं के साथ ही अन्य महिलाओं की आजीविका को भी संवार रही हैं। रुकमा जड़ी-बूटी से प्रतिवर्ष 80 हजार से एक लाख रुपये कमा लेती हैं। जड़ी-बूटी के कृषिकरण से रुकमा ने अपनी दो बेटियों की शादी कर दी है। 15 साल पहले रुकमा के पति ने छोड़ दिया था। इसके बाद वह अपने मायके वादुक गांव में रहने लगी। रुकमा ने उद्यान विभाग के सहयोग से जड़ी-बूटी का कृषिकरण शुरू किया। आज रुकमा ने गांव की तीन अन्य महिलाओं को भी जड़ी बूटी कृषिकरण को रोजगार से जाेड़ा है।
ट्रेकिंग की दुनिया में नाम कमा रहीं देवेश्वरी बिष्ट
इंजीनियर की नौकरी छोड़ देवेश्वरी बिष्ट ने ट्रेकिंग की दुनिया में कदम रखा तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। ट्रेकिंग के प्रति उनका जुनून ही था कि वह आज कई पर्वतों के शिखर नाप चुकी हैं। वर्ष 2015 से लेकर अब तक देवेश्वरी सैकड़ों लोगों को हिमालय की सैर करवा चुकी है। जिसमें पंच केदार, पंच बदरी, फूलों की घाटी, हेमकुंड, स्वर्गारोहणी सहित दर्जनों ट्रैक शामिल हैं। अपने हर ट्रैक के दौरान चमोली की रहने वाली देवेश्वरी स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिलाती हैं। देवेश्वरी हिमालय की वादियों से एक से एक बेहतरीन फोटो को अपने कैमरे में कैद कर देश दुनिया से रूबरू करवाती हैं।