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Shardiya Navratri 2023: महिला शक्ति जब खड़ी हुई तो सृष्टि को मिला नया स्वरूप, जिंदगियां संवार रहीं ये देवियां

Mon, 23 Oct 2023 04:17 PM IST
रेनू सकलानी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

महिला शक्ति जब खड़ी हुई तो सृष्टि को एक नया स्वरूप मिला है। महिलाओं ने पुरुष प्रभुत्व के क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाए।  हिमालय पर सैर करने के साथ अन्य को भी करवाने लगी। चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम रच दिए। आज पढ़िए ऐसी महिलाओं की कहानी ...
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देवेश्वरी देवी और लक्ष्मी नेगी - फोटो : amar ujala

नवरात्र शक्ति आराधना का पर्व है। आदि काल से मान्यता है कि महिला शक्ति जब-जब खड़ी हुई तो सृष्टि को नया स्वरूप मिला है। वह आपदा के दर्द को भुलाकर अपने कर्तव्यों में जुटी और अपनों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरती है तो वहीं आसपास के परिवेश को भी संवारती है।

कहीं शिक्षा के माध्यम से तो कहीं उन्हें अपना हुनर सिखाकर जीवकोपार्जन के लायक बना रही हैंं। उसने पुरुष प्रभुत्व के क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाए। हिमालय पर सैर करने के साथ अन्य को भी करवाने लगी। चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम रच दिए। लोगों को न्याय दिलाने में भी पूरी शक्ति लगा दी।

आपदा के दर्द से उबरकर सास-ससुर का बनीं सहारा
केदारघाटी के तनकिला गांव निवासी देवेश्वरी ने 16-17 जून 2013 की आपदा में अपने पति जय दर्शन सिंह और देवर मनमोहन को खो दिया था। तब बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। इसके बाद देवेश्वरी ने स्वयं दुख से उभरकर कपड़ा सिलाई का काम सीखा और कुछ वर्ष बाद गुप्तकाशी में दुकान खोली। जहां उन्होंने कई महिलाओं को कपड़े सिलना सिखाया। आज वह स्वरोजगार के सहारे बुजुर्ग सास-ससुर की देखरेख करने के साथ स्वयं भी आत्मनिर्भर होकर अन्य को भी प्रेरणा दे रही हैं। देवेश्वरी कहती हैं कि आपदा के जख्म तो अमिट हैं, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी से मुख नहीं मोड़ सकतीं।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं लक्ष्मी नेगी
कोटद्वार सनेह पट्टी के लालपानी निवासी लक्ष्मी नेगी ग्रामीण अंचल की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। वह वर्ष 2014 से अब तक रिसोर्स पर्सन के रूप में 565 समूहों का गठन कर जरूरतमंद 4500 महिलाओं को इससे जोड़ चुकी हैं। इन महिलाओं में कौशल वर्धन के साथ उन्हें वित्तीय साक्षरता के तहत बैंकों से भी जोड़ा गया है। वह वर्तमान में पदमपुर सुखरो की उड़ान स्वायत्त सहकारिता समिति की अध्यक्ष भी हैं। जिसके माध्यम से महिलाएं फूड प्रोसेसिंग, जूट बैग निर्माण, हर्बल धूप और मसाला प्रोसेसिंग व डेयरी उत्पादन का कार्य कर आजीविका कमा रही हैं। 

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मंजू नेगी और रंजना रावत - फोटो : amar ujala

1300 महिलाओं को दिखाया आत्मनिर्भरता का रास्ता
देहरादून के सुद्धोवाला निवासी मंजू नेगी पिछले 33 साल से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और समाजसेवा के क्षेत्र में काम रही हैं। वर्ष 1990 में कला केंद्र शुरू कर महिलाओं को सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, बैग, पर्स आदि बनाने और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की शुरुआत की थी। अब तक केंद्र से प्रशिक्षित 1,300 महिलाएं और युवतियां आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की 25 युवतियों के विवाह करवा चुकी हैं और गरीब बच्चों की स्कूल की फीस में भी सहयोग करती आ रही है। मंजू मौजूदा समय में भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हैं। 

महिला हितों के लिए काम कर रहीं रंजना रावत
नई टिहरी के सुपाणा गांव की रंजना रावत महिला उत्थान के लिए काम कर रही हैं। दो साल में ही उन्होंने करीब 60 समूह बनाकर 200 से अधिक महिलाओं को जोड़ा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। रंजना ने कीर्तिनगर क्षेत्र के अलग-अलग गांव में समूह बनाए हैं। देहरादून में इंटर तक पढ़ी रंजना परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही वह खुशहाल स्वयं सहायता समूह के माध्यम से फूड प्रोसेसिंग का काम कर रही हैं। क्षेत्र के धारकोट गांव की महिलाएं समूह बनाकर डंडोलियन, पैंय्याकोटी में रोजमेरी, केमोमाइल और मंगसू में गाय के गोबर के दिए बना रही हैं। रंजना की तीनों बेटियां और पति भी उनकी मदद करते हैं। 

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रुकमा देवी और देवेश्वरी बिष्ट - फोटो : amar ujala

रुकमा ने जड़ी-बूटी की खेती को बनाया आजीविका का साधन  

नंदानगर में वादुक गांव की 48 साल की रुकमा देवी 15 साल से जड़ी-बूटी की खेती कर स्वयं के साथ ही अन्य महिलाओं की आजीविका को भी संवार रही हैं। रुकमा जड़ी-बूटी से प्रतिवर्ष 80 हजार से एक लाख रुपये कमा लेती हैं। जड़ी-बूटी के कृषिकरण से रुकमा ने अपनी दो बेटियों की शादी कर दी है। 15 साल पहले रुकमा के पति ने छोड़ दिया था। इसके बाद वह अपने मायके वादुक गांव में रहने लगी। रुकमा ने उद्यान विभाग के सहयोग से जड़ी-बूटी का कृषिकरण शुरू किया। आज रुकमा ने गांव की तीन अन्य महिलाओं को भी जड़ी बूटी कृषिकरण को रोजगार से जाेड़ा है।

ट्रेकिंग की दुनिया में नाम कमा रहीं देवेश्वरी बिष्ट

इंजीनियर की नौकरी छोड़ देवेश्वरी बिष्ट ने ट्रेकिंग की दुनिया में कदम रखा तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। ट्रेकिंग के प्रति उनका जुनून ही था कि वह आज कई पर्वतों के शिखर नाप चुकी हैं। वर्ष 2015 से लेकर अब तक देवेश्वरी सैकड़ों लोगों को हिमालय की सैर करवा चुकी है। जिसमें पंच केदार, पंच बदरी, फूलों की घाटी, हेमकुंड, स्वर्गारोहणी सहित दर्जनों ट्रैक शामिल हैं। अपने हर ट्रैक के दौरान चमोली की रहने वाली देवेश्वरी स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिलाती हैं। देवेश्वरी हिमालय की वादियों से एक से एक बेहतरीन फोटो को अपने कैमरे में कैद कर देश दुनिया से रूबरू करवाती हैं।

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प्रो. मीनू और सीमा जौनसारी - फोटो : amar ujala

हर बच्चे का स्वस्थ जीवन है प्रो. मीनू का मिशन  

ऋषिकेश। प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक हैं। इससे पहले वह पीजीआई चंडीगढ़ में 40 साल सेवाएं दे चुकी हैं। मूल रूप से बाल रोग विशेषज्ञ प्रो. मीनू सिंह कहती हैं कि उनका जीवन का उद्देश्य देश के हर बच्चे का स्वस्थ जीवन है। वह हर बच्चे को स्वस्थ देखना चाहती हैं। वह जुलाई 2022 में एम्स में कार्यकारी निदेशक बनी थीं। उनके एक साल के कार्यकाल में किडनी प्रत्यारोपण की शुरूआत हुई। एम्स को लिवर प्रत्यारोपण की अनुमति मिली। इसके अलावा एम्स में इंटीग्रेटिव मेडिसिन, जेरियाट्रिक मेडिसिन, माॅलिक्यूलर मेडिसिन की सुविधा शुरू हुई। उन्हें कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अवार्ड भी मिल चुके हैं। 

बच्चों के सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए चलवाया अभियान

शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रदेशभर में प्रवेश उत्सव कार्यक्रम के रूप में अभियान चलवाया। उन्होंने बताया कि इससे स्कूल से बाहर रह गए बच्चे जहां शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल हुए, वहीं सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या में इजाफा हुआ है। अभियान का परिणाम रहा कि इस साल छात्र संख्या में 60 हजार से अधिक का इजाफा हुआ है। अभियान के तहत शिक्षकों ने गांव और घर-घर जाकर लोगों को सरकारी विद्यालयों में बच्चों के दाखिले के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा छात्र-छात्राओं को नशे से दूर रखा जा सके इसके लिए प्रार्थना सभाओं में बच्चों को इसके दुष्परिणाम के बारे में बताया गया।

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सुमति जखमोला और ऋतु शर्मा - फोटो : amar ujala

पीड़ितों को न्याय दिला रही अधिवक्ता सुमति जखमोला 

उत्तरी हरिद्वार निवासी अधिवक्ता सुमति रतूड़ी ज़खमोला कानून के माध्यम से घरेलू हिंसा और शोषण की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने की महिम में जुटी हैं। जिला न्यायालय हरिद्वार में शासकीय अधिवक्ता फौजदारी के पद पर कार्यरत सुमति ज़खमोला कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं एवं महिलाओं में विधि जागरूकता के प्रयास कर रही हैं। घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की शिकार ग्रामीण महिलाओं की काउंसलिंग कर उन्हें कानूनी लड़ाई के लिए तैयार करना उनका अभियान का प्रमुख हिस्सा है। अभियान में मित्रों सहकर्मियों और स्कूली छात्रों का छोटा सा समूह बनाया है। 

ऋतु जगा रही महिलाओं में योग की ललक

न्यू हरिद्वार कॉलोनी निवासी ऋतु शर्मा भारद्वाज परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ लोगाें को खासकर महिलाओं में योग की ललक भी जा रही हैं। वह सुबह पांच बजे उठकर पति को सहारनपुर ड्यूटी पर जाने के लिए नाश्ता आदि तैयार करती हैं। दो पुत्रियों को भी तैयार कर स्कूल भेजती हैं। इसके बाद कॉलोनी की महिलाओं को सुबह आठ बजे से साढ़े नौ बजे योग करवाती हैं, साथ ही साथ पंचकर्म, विरेषण आदि भी महिलाओं को करवाती हैं। उनका कहना है कि योग से महिलाओं को गंभीर रोग बचाने के साथ-साथ ही वजन भी कम हुआ है।

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शारदीय नवरात्र - फोटो : गूगल

नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ रहीं महिमा 

युवाओं को साहित्य के प्रति जागरूक करने के लिए महिमाश्री बीते लंबे समय से काम कर रही हैं। वित्त मंत्रालय में हिंदी सलाहकार के तौर पर कार्यरत रचना देश-विदेश में सैकड़ों काव्य पाठ कर चुकी हैं। हिंदी के क्षेत्र में काम कर रचना उत्तराखंड का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं, जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंच सके इसके लिए वह इन बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का भी काम करती हैं। इन बच्चों को लिए रचना सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों के लिए विशेष पाठशाला लगाती हैं।

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बिल्डर के खिलाफ लड़ी लड़ाई, तीन को पहुंचाया जेल

एक बिल्डर्स ने अपनी मनमानी की और भवन खरीदने के लिए 100 से अधिक खरीदारों के करोड़ों रुपये दबा लिए। समय से न तो मकान बनाकर दिए और न ही जमा रकम लौटाई। विरोध करने पर खरीदारों को धमकी मिलने लगी तो कविता भाटिया ने साहस दिखाआ। वह डरी नहीं और बिल्डर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाकर मोर्चा खोल दिया। पुलिस से मदद नहीं मिली तो रेरा से लेकर पीएमओ तक बिल्डर की शिकायत कराई। करीब पांच साल तक उन्होंने संघर्ष जारी रखा। आखिरकार हाल ही में कविता को जीत मिली और कंपनी के तीन बड़े निवेशकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

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