जहां एक ओर देश में बेटियों को आगे बढ़ाने और उनके सशक्तिकरण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर संत बेटी विरोधी बात कर रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
अपने विवादित बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले ज्योतिष एवं शारदा द्वारका पीठ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने फिर ऐसा ही बयान दिया है।
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प्रतीकात्मक
उनका कहना है कि पितरों को तृप्ति तब मिलती है जब उनका बेटा, पौत्र अथवा बेटी का बेटा दाह संस्कार और तर्पण करे।
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हिंदू धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि जो बेटियां माता-पिता का अंतिम संस्कार करती हैं। उनके माता-पिता को तृप्ति नहीं मिलती है। अपने इस बयान से स्वामी स्वरूपानंद फिर विवादों से घिर गए हैं।
अभी कुछ दिन पहले ही स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी मोदी सरकार के कामकाज को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।