वैसे तो भारत में कई ऐसी जगह है जो पुरातन काल की कहानियों को बयां करती हैं। लेकिन हम आपको बताते हैं एक ऐसी कहानी जो आज भी हकीकत बनी हुई है। कहते हैं राजा भगीरथ की कड़ी तपस्या के बाद माँ गंगा धरती पर आई। लेकिन एक ऐसी जगह भी है जहां माँ गंगा खुद भगवान शिव की परिक्रमा करती है।
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gangotri
जी हां, यह जगह है उत्तराखंड के पवित्र धाम गंगोत्री में। ये वो धाम है जो दुनिया में अपनी अलग ही पहचान बना चुके है। विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम में सूर्य कुंड और गौरी कुंड अपना अलग ही महत्व रखते हैं।
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gangotri
कहा जाता है कि आज भी भागीरथी की धारा इन्हीं कुंडों से होकर आगे बढ़ती है। पुराणों में भी इन दो कुंडों का उल्लेख किया गया है। इतना ही नहीं इनकी खूबसूरती निहारने के लिए दुनिया भर से सैलानी हर साल यहां पहुंचते हैं।
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gangotri dhaam
- फोटो : amarujala
कहा जाता है कि गंगोत्री में एक शिला पर बैठकर राजा भगीरथ ने साढ़े पांच हजार साल तक तपस्या की थी। राजा भगीरथ ने जिस शिला पर बैठकर तपस्या की थी, उसे भगीरथ शिला कहते हैं। ये शिला आज भी आपको यहां दिख जाएगी।
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Gauri Kund
मान्यता है कि जब गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी तब गंगोत्री मंदिर से कुछ दूरी पर ही राजा भगीरथ ने सूर्यदेव को जल चढ़ाया था। यहां भागीरथी एक धारा के रूप में पूरब दिशा की ओर कुंड में गिरती है। गंगोत्री मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर गौरी कुंड स्थित है। ये कुंड गंगा के बीच में विद्यमान है।
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बदहाली और उपेक्षा का दंश झेल रहा गौरी कुंड।
कहा जाता है कि गौरी कुंड में भगवान शंकर ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था। आज भी यहां पर पत्थर का एक शिवलिंग है। इस ही शिवलिंग की गंगा परिक्रमा करती हैं।
इस शिवलिंग के दर्शन शीतकाल में तब होते हैं, जब भागीरथी का जलस्तर कम रहता है। इस तरह की भी मान्यता है कि गौरीकुंड के अलावा रामेश्वरम में भी गंगा जल नहीं चढ़ाया जाता।
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।)