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उठ गया देश की सबसे रहस्यमयी झील में मानव कंकालों के राज से पर्दा, हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 08 Feb 2018 07:42 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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roopkund - फोटो : amarujala
देश की सबसे रहस्यमयी झील में भरे सैंकड़ों मानव कंकालों के राज से पर्दा उठ गया है। नर कंकालों के डीएनए टेस्ट से वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है।
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सम्राट सिकंदर के भारत आने के पहले भी ग्रीक देश के लोग उत्तराखंड आते रहे हैं। चमोली जिले में नंदा देवी चोटी के नीचे हिम झील में पड़े सैकड़ों नर कंकालों की डीएनए जांच से यह पता चला है। इस नए राज से पर्दा हटने के बाद विज्ञानी अब नए शोधों की तैयारी में जुट गए हैं।
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roopkund - फोटो : amarujala
पहले यह अंदाजा लगाया गया कि हो सकता है कि यह सिकंदर की सेना की टुकड़ी रही हो लेकिन रूप कुंड की यह घटना सिकंदर से ढाई सौ साल पहले की है। इसके साथ ही नर कंकालों के पास से युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले कोई हथियार नहीं मिले। यह माना जा रहा है कि ये ग्रीक देश के लोग यहां घूमने के लिए आए हों।

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roopkund - फोटो : amarujala
समुद्र तल से 16 हजार 499 फीट ऊंचाई पर स्थित रूप कुंड के नर कंकालों के 100 सैंपल की एक बार फिर जांच की गई। इनकी माइट्रोकोंड्रियल, ऑटो सुमल डीएनए और वाई क्रोमोसोमल डीएनए जांच कराई गई। इस जांच में यह तय हो गया है कि रूप कुंड के नर कंकालों में ग्रीक लोगों के भी कंकाल हैं।
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इसके साथ ही यहां स्थानीय लोगों के भी नरकंकाल पाए गए हैं। शोध टीम ने आसपास के क्षेत्र के आठ सौ लोगों की डीएनए जांच भी की है। यह पाया गया कि रूप कुंड में स्थानीय और विदेशी दो नर कंकाल समूह हैं।
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इस तथ्य ने विज्ञानियों को चौंका दिया है। बीरबल इंस्टीट्यूट आफ पेलियो साइंसेस के विज्ञानी डॉ. नीरज राय ने एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया में आयोजित कार्यशाला में इस संबंध में अपनी शोध प्रस्तुति दी।
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डॉ. नीरज राय ने बताया कि सैंपल की डीएनए जांच से ग्रीक का मिलान हो रहा है। ग्रीक के अलावा स्थानीय लोगों के नर कंकाल भी हैं। इसमें अभी और शोध की जरूरत है। शोध से अभी इसकी और परतें खुलेंगी।
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roopkund - फोटो : amarujala
उन्होंने बताया कि सिकंदर 1000 ईसवी में यहां आया और ये नरकंकाल 850 ईसवी के हैं। दोनों घटनाओं  में ढाई सौ साल का गैप है। रूप कुंड राज की और परतें खोलने के लिए एंथ्रोपोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया के रीजनल आफिस भी नए प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रहा है।
 
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