फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

Thu, 09 Jul 2015 08:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 8
रुड़की में हरिद्वार रोड पर बुधवार की दोपहर बच्चों से भरी एक स्कूली वैन की जबर्दस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन के आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई।
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

2 of 8
चीखपुकार सुनकर मदद के लिए दौड़े स्थानीय लोगों ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। गनीमत रही कि वैन में सवार मासूम बच्चों की जिंदगी बाल-बाल बच गई।
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

3 of 8
वैन में 30 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। सभी बच्चों को मामूली चोटें आई हैं।

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

4 of 8
बच्चों की डायरी से नंबर लेकर उनके पर‌िजनों को सूचना दी गई। सूचना म‌िलते ही उनके पर‌िजन भागे-भागे घटनास्थल पर पहुंचे।
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

5 of 8
स्कूल से घर लौटते वक्त अचानक हुए हादसे से बच्चे बदहवास हो गए। स्थानीय लोगों के बाहर निकालने के बाद जैसे ही उनके मां बाप मौके पर पहुंचे, बच्चे बिलखकर उनसे लिपट गए।
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

6 of 8
स्कूल वैन घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडर से चलाई जा रही थी। गनीमत रही कि टक्कर आगे के हिस्से में लगी और सिलेंडर व गैस किट वैन के पिछले हिस्से में लगाई गई थी। सिलेंडर पर प्रेशर पड़ने पर वैन आग का गोला भी बन सकती थी।
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

7 of 8
कंट्रोल रूम की सूचना पर पुलिस ने ड्राइवर जहांगीर पुत्र मुर्सलीन निवासी पाडली गुर्जर को हिरासत में ले लिया। ड्राइवर के पास लाइसेंस भी नहीं था। बच्चों को वैन से सुरक्षित बाहर निकालने वाले स्थानीय लोगों ने अभिभावकों की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
विज्ञापन

हादसे में बाल-बाल बचे 30 मासूम, तस्वीरों में दहशत का मंजर

8 of 8
बच्चों को वैन से बाहर निकालने वाले हैपी आहूजा, जॉनी आदि ने बताया कि वैन में 30 बच्चे बुरी तरह ठूंसकर भरे गए थे। उन्होंने अभिभावकों से पूछा कि 700 रुपये किराया देकर बच्चों की जान खतरे में क्यों डालते हो। इस पर कोई जवाब दिए बिना अभिभावक अपने बच्चों को घर ले गए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें