पंडित ओमप्रकाश सती ने बताया कि शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। इसलिए शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर शिवजी की पूजा करें।
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पूजा में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं। कच्चा धागा लेकर शिव पार्वती के चारों ओर लपेटें और ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।
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इसके अलावा सावन मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन संध्या काल में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है।
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इस समय को प्रदोष काल माना गया है। इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय शिवजी और देवी पार्वती की पूजा से मनोकामना पूरी होती हैं।