फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sawan 2023: सावन का पहला सोमवार...बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठे देवभूमि के शिवालय, देखिए तस्वीरें

Mon, 10 Jul 2023 10:39 AM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तराखंड
विज्ञापन
1 of 5
हल्द्वानी में भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala
सावन माह के पहले दिन प्रदेश के शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों के आने का सिलसिला जारी है। तड़के से शिवालय में हजारों शिवभक्त लंबी कतार में लगे हैं। बम-बम भोले के जयकारों के देवभूमि के शिवालय गूंज उठे हैं।

इस बार सावन का महीना चार जुलाई मंगलवार से शुरू हुआ है। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी के संत स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि मासों में उत्तम पुरुषोत्तम मास की शुरुआत सावन के मध्य से हुई है। इस बार श्रावण मास 59 दिनों का होगा। खास बात यह है कि इस वर्ष श्रावण मास में आठ सोमवार होंगे।

शिवोपासना संस्थान डरबन साउथ अफ्रीका एवं शिव उपासना धर्मार्थ ट्रस्ट, हरिद्वार के संस्थापक स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि भगवान शिव को श्रावण मास अति प्रिय है। श्रावण मास के पहले दिन मंगला गौरी व्रत, त्रिपुष्कर योग और शिव मास का शुभ संयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए कल्याणकारी होगा।
विज्ञापन

2 of 5
उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में शिव शक्ति मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala
पहले दिन दोपहर 11 बजकर 49 मिनट तक इन्द्र योग रहेगा, उसके बाद वैधृति योग लग जाएगा।
विज्ञापन

3 of 5
सावन के पहले सोमवार को विकासनगर में मंदिर में जलाभिषेक करते श्रद्धालु। - फोटो : amar ujala
इंद्र योग की बात करें तो इस योग के दौरान राज्य पक्ष के कार्यों में अथवा सरकारी कामों में सफलता जरूर मिलती है।

4 of 5
रुड़की सिविल लाइन शिव मंदिर जलाभिषेक करने के लिए लगी श्रद्धालुओं की लाइन - फोटो : amar ujala
वहीं अगर वैधृति योग की बात करें तो यह स्थिर कार्यों के लिए ठीक है परंतु यदि कोई भागदौड़ वाला कार्य अथवा यात्रा करनी हो तो इस योग में नहीं करनी चाहिए। साथ ही इस दिन सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लग जाएगा, जो की चार जुलाई सुबह पांच बजकर 39 मिनट तक रहेगा। 
 

ये भी पढ़ें...Kanwar Yatra: बारिश में भी चरम पर उत्साह, अब तक 89 लाख भक्तों ने भरा जल, हरकी पैड़ी पर पैर रखने की जगह नहीं



 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
रुड़की में मंदिर में जलाभिषेक के लिए लगी भक्तों की कतार - फोटो : amar ujala
वहीं, सावन की शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। इसलिए शिवजी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करनी चाहिए। सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर शिवजी की पूजा करें। पूजा में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें