उत्तराखंड में भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित कैंची धाम स्थापना के बाद से जनमानस के लिए अपार श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है। यहीं पर आकर बदली थी स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग जैसी हस्तियों की तकदीर...
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देखिए, ये हैं जुकरबर्ग की जिंदगी बदलने वाले नीम करोली बाबा
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नीम करोली बाबा द्वारा स्थापित कैंची धाम के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा यूं ही नहीं, बल्कि हकीकत यह है कि यहां सच्ची भक्ति और दिल से मांगी गई हर मुराद बाबा के आशीर्वाद से पूरी होती है।
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यही नहीं दुनिया कई दिग्गज हस्तियां नीम करोली बाबा की शिष्य रही हैं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स से लेकर फेसबुक के सीईओ जुकरबर्ग की तकदीर बाबा के आश्रम में आकर ही बदली। दोनों ने खुद ये बात स्वीकारी।
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पिछले दिनों पीएम मोदी के अमेरिका दौरे में फेसबुक के संस्थापक जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री से बाबा के आश्रम में आने की बात बताई थी।
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जुकरबर्ग ने पीएम मोदी से बताया कि फेसबुक अच्छी स्थिति में नहीं था और वे बहुत निराश थे। तभी उनके गुरु और दिग्गज तकनीकी कंपनी एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत में रहकर अध्यात्म की शरण में जाने की सलाह दी थी। जिसके बाद वे नीम करौरी बाबा के कैंची आश्रम में आए।
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नैनीताल जिले में शिप्रा नदी के तट पर स्थित कैंची मंदिर के स्थापना के पीछे रोचक कथा है। महाराज के मन में उठी मौज ही उनका संकल्प बन जाती थी। बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1942 में कैंची निवासी पूर्णानंद तिवारी सवारी के अभाव में नैनीताल से गेठिया होते हुए पैदल ही कैंची की ओर वापस लौट रहे थे, तभी एक स्थूलकाय व्यक्ति कंबल लपेटे हुए नजर आया तो पूर्णानंद डर गए।
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उस व्यक्ति ने पूर्णानंद को उनका नाम लेकर पुकारा और इस समय उनके वहां पहुंचने का कारण भी बता दिया। यह कोई और नहीं बल्कि स्वयं बाबा नीम करौली महाराज थे। बाबा ने पूर्णानंद से कुछ और बातचीत की और निडर होकर आगे बढ़ने को कहा। तब पूर्णानंद ने बाबा से पूछा कि अब कब उनके दर्शन होंगे तो बाबा ने तपाक से जवाब दिया कि 20 साल बाद। यह कहकर बाबा ओझल हो गए।
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ठीक 20 साल बाद बाबा नीम करौली महाराज तुलाराम साह और श्री सिद्धि मां के साथ रानीखेत से नैनीताल जा रहे थे, तभी बाबा जी कैंची में उतर गए और कुछ देर तक पैराफिट में बैठे रहे वहीं उन्होंने पुरानी याद ताजा की और वह स्थान देखने की इच्छा जताई जहां साधु प्रेमी बाबा और सोमवारी महाराज ने वास किया था।
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24 मई 1962 को बाबा के पावन चरण उस भूमि में रखे जहां वर्तमान में कैंची मंदिर स्थित है। इस तरह बीस साल पुरानी मनसा शक्ति ने कैंची धाम की स्थापना की। तब बाबा ने कैंची धाम में उस समय घास और जंगल के बीच घिरे चबूतरे और हवन कुंड को ढकने को कहा। (यह वही चबूतरा है जहां सोमवारी बाबा ने वास किया था)
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वर्तमान में इस स्थान पर हनुमान जी का मंदिर है। इसी में सोमवारी बाबा की धूनी के अवशेष आज भी सुरक्षित हैं। 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है।