Gopal Das neeraj
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कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज का दून से पुराना नाता रहा है। उन्होंने अपने एक लेख में अपनी कविता, ब्रिटिश हुकूमत की बेरुखी और दून से भागने की वजह बताई थी। उन्होंने वर्ष 1942 में एक कविता लिखी थी, ‘मैं विद्रोही हूं जग में विद्रोह करने आया हूं, बहुत कुछ बदल गया है, चाहे शोर समय का या जोर हवाओं का’। इस कविता को अंग्रेजी हुकूमत ने देश विरोधी माना। उन्होंने माना कि इससे आजादी की चिंगारी भड़क सकती है। इसलिए सरकार ने गोपालदास नीरज के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था। आखिरकार उन्हें देहरादून छोड़कर जाना पड़ा था।