दिल्ली को दमघोंटू स्मॉग के वातावरण में धकेलने की मुख्य विलेन पश्चिमी हवाएं हैं। सिर्फ दिल्ली ही नहीं पश्चिमी हवाओं के साथ आई इस धुंध का असर गंगा बेसिन में भी देखने को मिलेगा।
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खासतौर पर धुंध से इस बार सर्दी की सख्ती बढ़ जाएगी। इसके अलावा कृषि पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। फसलों पर पाले की मार बढ़ जाएगी।
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दिल्ली, फरीदाबाद, गुड़गांव के बाद आगरा की स्थिति चिंताजनक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
पश्चिमी हवाओं का दिल्ली और आसपास के इलाकों में पहुंचने का समय वैसे तो नवंबर का आखिरी हफ्ता या दिसंबर का पहला सप्ताह होता है, लेकिन इस बार भूमध्य सागर की तरफ से ये हवाएं मध्य एशियाई देशों से धूल कण आदि एयरोसोल लेकर पहले ही आ गई हैं।
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स्मॉग से सांस लेना हुआ दुश्वार, रविवार को सबसे ज्यादा हुई दिक्कत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक और वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एके गुप्ता का कहना है कि पश्चिमी हवाएं समय से पहले आ गई हैं। इनके साथ मिनरल्स डस्ट आदि भी आती है।
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- फोटो : अमर उजाला
दीपावली में पटाखे के धुएं को धुंध की वजह मानने से डॉ. एके गुप्ता ने इनकार कर दिया।
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- फोटो : Bureau
धुंध की गहरी चादर के साथ पश्चिमी हवाओं के पहुंचने से दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड समेत आसपास के इलाकों में इस बार ठंड की शिद्दत अधिक हो सकती है।
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- फोटो : pti
धुंध की चादर की वजह से सूर्य की किरणें जमीन पर अधिक गरमाहट नहीं ला पाएंगी। इसके अलावा फसलों पर पाले की मार बढ़ेगी। इससे आलू आदि की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। गंगा बेसिन में यह धुंध भरी रहेगी। यहां की फसलों में अधिक दिक्कत आ सकती है।