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रामपुर तिराहा कांड: आंदोलनकारियों पर बरसा था खाकी का कहर, चुन-चुन कर मारी गई थी गोली, तस्वीरें...

Wed, 02 Oct 2019 04:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर एक अक्तूबर 1994 की रात में आंदोलनकारियों पर खाकी का जो कहर बरपा था, उसके जख्म शायद ही कभी भर पाएं। अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने चुन-चुन कर निशाना बनाया था। 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
पुलिस की तरफ  से 24 राउंड फायरिंग का दावा किया गया था, जिसमें सात की मौत हुई थी और 17 आंदोलनकारी जख्मी हुए थे। यानी पुलिस का एक भी निशाना चूका नहीं था। पृथक राज्य की मांग को लेकर उत्तराखंड के आंदोलनकारी 24 बसों में दिल्ली में दो अक्तूबर को प्रस्तावित रैली में भाग लेने जा रहे थे। 
 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
गुरुकुल नारसन में आंदोलनकारियों के बैरियर तोड़कर आगे बढ़ जाने के बाद शासन के निर्देश पर मुजफ्फरनगर पुलिस ने उन्हें रामपुर तिराहे पर रोकने की योजना बनाई थी। पूरे इलाके को सील कर आंदोलनकारियों की बसों को रोक लिया था। 

 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
इस पर आंदोलनकारियों ने सड़कों पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी थी। आंदोलनकारी दिल्ली जाने की जिद पर अड़े थे। इसी बीच हुई पत्थरबाजी में तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। 

 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को पीटा गया। करीब ढाई सौ लोगों को हिरासत में लिया था। इसके बाद देर रात पौने तीन बजे के बीच 42 बसों में आंदोलनकारियों के आने की खबर आई तो रामपुर तिराहे पर अवरोध खड़े कर दिए गए। उन्हें रोकने के लिए अलग से फायरिंग दस्ता भी बनाया गया। 
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
हिंसक झड़पों के बीच पुलिस ने फायरिंग कर दी। पुलिस का दमनचक्र सुबह तक चलता रहा। फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की जान चली गई, जबकि 17 घायल हुए थे। पुलिस ने लिखापढ़ी में घटनास्थल से इतने ही खोखे बरामद किए थे।
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जाहिर है कि पुलिस ने आंदोलनकारियों पर चुन-चुन कर गोलियां चलाई थी। यहीं नहीं जान बचाने को जंगलों की तरफ  गईं महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ किया गया था। 
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