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अयोध्या राम मंदिर से इसलिए जुड़ा है तीर्थ नगरी हरिद्वार का नाम, पढ़ें छह खास बातें

Tue, 14 Jul 2020 04:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
आज अमर उजाला आपको अयोध्या राम मंदिर निर्माण से जुड़ा ऐसा सच बताने जा रहा है जो बहुत कम लोगों की जानकारी में है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर निर्माण की भूमिका तीर्थ नगरी हरिद्वार में बनी थी। हरिद्वार में आठ मार्गदर्शक मंडलों की बैठक हुई थी। यहां तक कि छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे की तिथि भी हरिद्वार में ही तय हुई थी। पंतद्वीप मैदान से इसकी घोषणा हुई थी।
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विश्व हिंदू परिषद - फोटो : फाइल फोटो
धर्मनगरी में विश्व हिंदू परिषद की गतिविधियां 1983 से बढ़नी शुरू हुई थीं। तब गंगा एकात्मता यात्रा हरकी पैड़ी से शुरू हुई थी। अयोध्या में विवादित ढांचे को लेकर विहिप की बैठकों का केंद्र हरिद्वार बन गया था।

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अयोध्या राम जन्मभूमि
1992 की जनवरी में परमार्थ आश्रम में हुई राम जन्मभूमि न्यास की गोपनीय बैठक से इस कार्य में तेजी आनी शुरू हुई। 1992 मई में विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक हरिद्वार में हुई।
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- फोटो : अमर उजाला (file photo)
बैठक में संतों ने फैसला लिया कि छह दिसंबर को अयोध्या में कारसेवा की जाए। इसके बाद कुल पांच बैठक हरिद्वार में हुईं। इन बैठकों में मंदिर निर्माण की रूपरेखा रची गई। गंगा की इसी नगरी में मंदिर निर्माण के लिए शिलाएं इकट्ठा करने का निर्णय हुआ।
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- फोटो : file photo
हरिद्वार में दो धर्म संसद और हुईं। दोनों के आयोजनों में देश भर से शंकराचार्य, माधवाचार्य, रामानुजाचार्य, रमानंदाचार्य तथा षड़दर्शन संत उपस्थित हुए। कार सेवा में घीसापंथी संत आचार्य जगदीश मुनि का बड़ा योगदान रहा, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं।
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