कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर राहुल गाधी के चुने जाने का ऐलान होते ही कांग्रेस भवन में जमकर जश्न मना। कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे को जमकर गुलाल लगाया। मिठाईयां बांटकर खुशी मना रहे कार्यकर्ता घंटों ढ़ोल की थाप पर थिरकते रहे। करीब तीन घंटे तक कांग्रेस भवन में जश्न का माहौल रहा।
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शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की ताजपोशी को कांग्रेस के नए युग की शुरूआत बताया। महानगर कांग्रेस की ओर से पिछले कई दिनों से कांग्रेस मुख्यालय में जश्न की तैयारियां की जा रही थी। सोमवार को दिल्ली से जैसे ही राहुल के नाम का ऐलान हुआ, कांग्रेस मुख्यालय में मौजूद सभी कार्यकर्ता झूम उठे।
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कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की और राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाए। ढ़ोल और शहनाई के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता ने जमकर डांस भी किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि राहुल गांधी के 60वां निर्विरोध अध्यक्ष बनने से पार्टी में नई ऊर्जा का संचार होगा। इसका सकारात्मक असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिलेगा।
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वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि 132 साल पुरानी पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने पर खुश है। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी ने हमेशा तवज्जो दी है और वह संगठन को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता दोगुनी ताकत से संगठन को मजबूत करने पर फोकस करेंगे।
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राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी 2019 में केंद्र में भी वापसी करेगी। कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक राजकुमार, महानगर मीडिया प्रभारी महेश जोशी, जोत सिंह बिष्ट, डा. संजय पालीवाल, विजय सारस्वत, अशोक वर्मा, पंकज मेसोन, लालचंद शर्मा, दीप बोरा, बीना बिष्ट, मंजू त्रिपाठी, पुष्पा पंवार, रजनी रावत, प्रशांत खंडूडी, ओमप्रकाश सती, विकास नेगी समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियां महानगर कांग्रेस की ओर से कई दिनों से की जा रही थी। कांग्रेस भवन में साफ-सफाई और रंग रोगन भी किया गया। सोमवार को पूरे कांग्रेस मुख्यालय को फ्लैक्स, होर्डिंग्स से पाट दिया गया। तीन बजे होने वाले ऐलान के लिए परिसर में कुर्सियां लगाई गई, जिसके साथ ढ़ोल और शहनाई वालों भी बुलाया गया। करीब तीन बजे जब दिल्ली से ऐलान हुआ तब तक भी कुर्सियां नहीं भर पाई। कार्यकर्ता काफी कम संख्या में पहुंचे।