धनतेरस इस बार आगामी पांच नवंबर को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित हरिओम उनियाल के अनुसार, धनतेरस से पहले 31 अक्टूबर को कई सालों बाद बुध पुष्प नक्षत्र का योग बन रहा है। यह नक्षत्र बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र में किया काम पूरी तरह से फलदायी होता है। पुष्य नक्षत्र को धनतेरस की तरह स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा है। यह 28 नक्षत्रों में 8वां नक्षत्र है और 12 राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है।
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पुष्य नक्षत्र के सभी चरणों के दौरान चंद्रमा अन्य किसी राशि का स्वामी नहीं है, इसलिए पुष्य नक्षत्र को सुख-शांति व धन-संपत्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। धनतेरस से पहले ही पुष्य नक्षत्र 30 अक्टूबर को रात 3 बजकर 50 मिनट से शुरू हो जाएगा। इसका प्रभाव 31 अक्टूबर की रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में अगर आप सुबह के समय खरीदारी, भूमि पूजन, लेन-देन का काम करेंगे तो यह शुभ होगा।
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इस दिन अहोई अष्टमी पूजन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिन राजयोग भी बन रहा है। यह सुबह 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। इस समय में कोई भी नया काम, नया व्यवसाय शुरु किया जा सकता है। इस दिन मां लक्ष्मी को चांदी का सिक्का चढ़ाने से भी अपार कृपा बरसती है।
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पुष्य नक्षत्र में चांदी या इससे निर्मित आभूषण, बर्तन, पूजन सामग्री, शुभ प्रतीक आदि खरीदने से घर में बरकत बनी रहती है। आप दिन पुखराज, नीलम, मोती आदि रत्न खरीद सकते हैं। इससे आपको भविष्य में धन का संकट दूर हो जाएगा।
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इस दिन बन रहे शुभ योग में आप दुपहिया या चार पहिया वाहन खरीदें। इस दिन खरीदे गए वाहन लंबे समय तक चलते हैं। यह अपने साथ अन्य शुभ संयोग भी लेकर आते हैं। इस खास योग में मकान, प्लॉट व फ्लैट खरीदना भी शुभ होता है। दिन दिन खरीदी गई संपत्ति दोगुना फायदा देती है।
इस दिन पीतल तांबे या फिर कांसे के बर्तनों की खरीदी करना भी शुभ होता है। अगर आप निवेश करने के लिए पुष्य नक्षत्र का दिन अत्यंत शुभ है। इस योग में दीपावली के लिए घर की सजावट व अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं खरीदने से परिवार में अनुकूलता आती है।