दो महीने की जद्देजहद के बाद पुलिस की गिरफ्त में आए एक चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा की पेशी के दौरान न्यायालय परिसर को छावनी में तब्दील किया गया था। इतने कड़े और सख्त तामझाम पर पुलिस का तर्क था कि भीड़ नियंत्रण के लिए यह व्यवस्था की गई थी।
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उमेश कुमार
उमेश ने न्यायालय में शुरूआती बहस खुद की। उसने बार-बार न्यायालय से यही बात कही कि वह सब स्टिंग जनता की भलाई के लिए करते हैं। सरकारी मशीनरी पर उसने आरोप लगाए कि वह काफी हद तक भ्रष्टाचार में लिप्त है। उसने वसूली के आरोपों से इंकार किया और इसके पक्ष में अपने तर्कों को भी रखा।
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उमेश कुमार
हालांकि, उमेश के इन तर्कों के जवाब में पुलिस ने भी अपने तर्कों को रखा और न्यायालय में वीडियो-व्हाट्सएप चैटिंग के कई स्क्रीन शॉट दिखाए। इस पर उमेश ने कहा- वह जल्द एक बड़ा खुलासा करने वाला है। पुलिस ने भविष्य में आरोपों के पक्ष में कई साक्ष्य पेश करने का दावा न्यायालय में किया। लेकिन इस दौरान पुलिस असहज भी नजर आई।
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पुलिस
बता दें कि सोमवार सुबह साढ़े दस बजे उमेश को न्यायालय में पेश करने के लिए लाया गया था। इस दौरान वहां एसपी सिटी प्रदीप कुमार राय, सीओ सिटी, सीओ सदर, सीओ विकासनगर और सीओ मसूरी के साथ दो एसएचओ, चार एसओ समेत 100 पुलिस कर्मचारी मौजूद थे।
महिला पुलिसकर्मियों को भी परिसर में तैनात किया गया था। न्यायालय के बाहर भी चौकसी के कड़े प्रबंध किए गए थे। हालांकि, इस दौरान कोई अप्रिय अथवा अवांछनीय घटना नहीं हुई। ऐसे में इतने कड़े तामझाम की जरूरत क्या थी? इसके उत्तर में अधिकारियों का कहना था कि हाई प्रोफाइल केस में कई बार भीड़ बढ़ जाने के चलते एहतियातन कदम उठाने पड़ते हैं। उच्चाधिकारियों के आदेशों के अनुसार व्यवस्था की गई थी।