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#PulwamaAttack:चेहरा तक नहीं देख पाए शहीद वीरेंद्र की पत्नी और बच्चे, ताबूत से लिपटकर रोया पूरा गांव

Tue, 19 Feb 2019 04:35 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, खटीमा
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शहीद वीरेंद्र सिंह
शहीद वीरेंद्र सिंह राणा के पार्थिव शरीह को ताबूत में लेकर सीआरपीएफ के जवान जब घर पहुंचे तो ताबूत को नहीं खोला गया। बदहवास शहीद की पत्नी रेनू, मासूम बच्चे और परिजनों ने ताबूत से लिपटकर वीरेंद्र के अंतिम दर्शन किए और श्रद्धांजलि दी। अंत्येष्टि में भी ताबूत को चिता पर रखकर मुखाग्नि दी गई। परिजनों के मन में शहीद का चेहरा आते ही उनकी आंखें छलक पड़तीं...। 
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शहीद वीरेंद्र सिंह
शहीद वीरेंद्र सिंह राणा के शव को लेकर पहुंचे सीआरपीएफ के अधिकारियों और जवानों की आंखों में भी आतंकियों की कायराना हरकत के खिलाफ आक्रोश नजर आया। दिल्ली से पांच बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट मुकेश पीपी, श्रीनगर से आए 45वीं बटालियन के हवलदार अशोक अपनी टीम के साथ शहीद वीरेंद्र के घर पार्थिव देह लेकर पहुंचे। 
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शहीद वीरेंद्र सिंह
श्मशान घाट में काठगोदाम से आए सीआरपीएफ के डीआईजी प्रदीप चंद्र ने अंत्येष्टि के दौरान शहीद के पिता दीवान सिंह से वार्ता की। उन्होंने कहा कि एक जवान जरूरी कागजी कार्रवाई के लिए तीन-चार दिन यहीं रहेगा। अंतिम यात्रा में आतंकियों और पाक के खिलाफ नारेबाजी और गुस्से को देखकर सीआरपीएफ के अधिकारी और जवानों की आंखों में भी पाक के खिलाफ गुस्सा साफ झलक रहा था। 

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शहीद वीरेंद्र सिंह
शहीद के घर मोहम्मदपुर भुड़िया से श्मशान घाट तक करीब आठ किमी तक अंतिम यात्रा में शहीद की एक झलक पाने और श्रद्धांजलि देने के लिए लोग उमड़ पड़े। इस बीच, प्राथमिक और माध्यमिक समेत कई  निजी स्कूलों के बच्चों ने सड़क से सटे स्कूल से निकलकर कतार खड़े होकर शहीद को श्रद्धांजलि दी और ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, शहीद वीरेंद्र तेरा नाम रहेगा’ के नारे लगाए। 
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martyr virendra singh
जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने वाले 80 वर्षीय दीवान सिंह राणा  का कहना है कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश के काम आया। मेरा पोता बयान बड़ा होकर सेना में भर्ती होकर पाकिस्तान से बदला लेगा। अब बहुत हो गया है, आतंकी देश पाकिस्तान को नेस्तोनाबूत कर दो। 
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martyr virendra singh
शहीद के भाई जयराम का कहना था कि ‘आतंकियों से बदला लिया जाए, तभी उनके भाई की आत्मा को शांति मिलेगी।’ शहीद के जीजा रामकिशन, चचेरे भाई धर्मेंद्र और रमेश राणा ने कहा कि भारत सरकार को आतंकियों और उनके पनाहगार देश पाकिस्तान को सख्त सबक सिखाना चाहिए। 
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martyr virendra singh
साथ ही पत्थरबाजों को भी नहीं बख्शना चाहिए। शहीद के भाई जयराम की तरह बीएसएफ से सेवानिवृत्त नगरा तराई निवासी सुरेश चंद्र राणा ने कहा कि उन्होंने आठ वर्ष तक बॉर्डर पर पाकिस्तान को गोलियों से जवाब दिया है, अब सरकार कहे तो दूसरी पारी में मानव बम बनने के लिए भी वह तैयार हैं। 
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