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पुलवामा हमला : शहीद के पिता बोले ‘सेना में भर्ती होकर पाकिस्तान से बदला लेगा मेरा पोता’ 

Sun, 17 Feb 2019 09:38 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खटीमा
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martyr virendra singh
'मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश के काम आया। मेरा पोता बयान सिंह बड़ा होकर सेना में भर्ती होकर पाकिस्तान से बदला लेगा। अब बहुत हो गया है, आतंकी देश पाकिस्तान को नेस्तोनाबूत कर दो।'
 
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यह कहना है जवान बेटे की अर्थी को कंधा देने वाले 80 वर्षीय दीवान सिंह राणा का। शहीद के परिजनों का भी यही कहना था कि यही समय है जब भारत सरकार को आतंकियों और उनके पनाहगार देश को करारा जवाब देना चाहिए।
 
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परिवार मूल रूप से रानीखेत के पीपली का रहने वाला है।शनिवार को प्रतापपुर स्थित शमशान घाट पर अंत्येष्टि के दौरान शहीद जवान के पिता दीवान सिंह बोले, हम महाराणा प्रताप के वंशज हैं। मेरे बेटे वीरेंद्र ने देश के लिए बलिदान दिया है। वीरेंद्र ने देश सेवा करने की ठानी थी।
 

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सीआरपीएफ में भर्ती होने के लिए उसने (वीरेंद्र) बहुत मेहनत की थी लेकिन कायरों ने उसकी जान ले ली।’ बेटे की याद आते ही दीवान सिंह फफक पड़े। वह फिर भी यही कहते रहे कि ‘मेरे बेटे ने बलिदान दिया है अब मेरा पोता बयान दुश्मनों से बदला लेगा। ढाई वर्षीय पोते बयान को भी वह सेना में भर्ती कराएंगे।’
 
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शहीद के भाई जयराम का कहना था कि ‘आतंकियों से बदला लिया जाए, तभी उनके भाई की आत्मा को शांति मिलेगी।’ शहीद के जीजा रामकिशन, चचेरे भाई धर्मेंद्र और रमेश राणा ने कहा कि भारत सरकार को आतंकियों और उनके पनाहगार देश पाकिस्तान को सख्त सबक सिखाना चाहिए। साथ ही पत्थरबाजों को भी नहीं बख्शना चाहिए।
 
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शहीद के भाई जयराम की तरह बीएसएफ से सेवानिवृत्त नगरा तराई निवासी सुरेश चंद्र राणा ने कहा कि उन्होंने आठ वर्ष तक बॉर्डर पर पाकिस्तान को गोलियों से जवाब दिया है, अब सरकार कहे तो दूसरी पारी में मानव बम बनने के लिए भी वह तैयार हैं। 
 
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‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, वीरेंद्र तेरा नाम रहेगा...’, ‘वीरेंद्र सिंह अमर रहे’, भारत माता की जय के गगनभेदी नारों के बीच शहीद वीरेंद्र सिंह राणा की सैन्य सम्मान के साथ प्रतापपुर नंबर चार स्थित श्मशान घाट पर अंत्येष्टि की गई। शहीद की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन को जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहीद को उनके बेटे बयान ने अपने चचेरे भाइयों के साथ मुखाग्नि दी। शहीद की अंतिम यात्रा में केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए।
 

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दिल्ली से शनिवार सुबह करीब आठ बजे सीआरपीएफ के जवान शहीद वीरेंद्र सिंह की पार्थिव देह को लेकर उनके गांव मोहम्मपुर भुड़िया पहुंचे। पार्थिव शहीर के घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद की पत्नी रेनू, दोनों बच्चे बेटी रोही और बेटा बयान, पिता दीवान सिंह राणा, दोनों भाई जयराम सिंह राणा और राजेश सिंह राणा, बहनें और भाभियां ताबूत से लिपटकर रोने लगीं। शहीद की पार्थिव देह को करीब आधे घंटे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद अंतिम यात्रा शुरू हुई।
 

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अंतिम यात्रा में शहीद ‘वीरेंद्र सिंह अमर रहे’, ‘भारत माता की जय’, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, वीरेंद्र तेरा नाम रहेगा’ के गगनभेदी नारे गूंजते रहे। शहीद वीरेंद्र की अंत्येष्टि उनके गांव से करीब आठ किमी दूर प्रतापपुर नंबर चार स्थित श्मशान घाट पर की गई। श्मशान घाट पर काठगोदाम से आए सीआरपीएफ के दल ने अंतिम सलामी दी। सीआरपीएफ के डीआईजी प्रदीप चंद्र ने ताबूत से राष्ट्रीय ध्वज हटाकर इसे शहीद के पिता दीवान सिंह को सौंपा। शहीद वीरेंद्र के ढाई वर्षीय पुत्र बयान सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। शहीद के रिश्तेदार ने पाकिस्तान से बदले की मांग की।
 

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सीआरपीएफ के डीआईजी प्रदीप चंद्र ने कहा कि शहीद के परिजनों को अंतिम संस्कार हेतु बतौर सहायता पचास हजार नगद भुगतान किया गया है। जबकि विभागीय वरिष्ठ अधिकारी अर्जित शंकर ने कहा कि शहीद विरेंद्र की पत्नी नौकरी चाहेगी तो नौकरी दी जायेगी। शेष विभागीय सारी सुविधाएं दी जाएगी। इसके लिये एक कर्मचारी कुछ दिन शहीद के घर रहकर जरूरी कागजात तैयार करेगा।
 
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केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कहा कि देश की 130 करोड़ जनता शहीद वीरेंद्र सिंह के परिवार के साथ है। उन्होंने कहा कि देश की जनता जो चाहेगी वही प्रधानमंत्री को करना है। उन्होंने शहीद के परिजनों को साहस एवं धैर्य से काम लेने की अपील की। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि शहीद का परिवार पूरे देश का परिवार है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ ने कहा कि दुख की इस घड़ी में देश की जनता शहीद के परिजनों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अपनी बात एक सिर के बदले 10 सिर लाने का वादा पूरा करना चाहिए। इस समय पूरा विपक्ष सरकार के साथ है। 
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