martyr major vibhuti
उसकी पथराई आंखों में फिर नमी बढ़ती जा रही थी। बेकाबू आंसू, लुढ़कर उसके गालों पर फैलने लगे। उंगलियों में उन्हें बटोरने की असफल कोशिश करती हुई, वह बोली...बुआ, वह हीरो हैं। निकिता की दो अंगुलियां मेजर की तस्वीर की ओर थी। होठ, थरथरा रहे थे, शब्द बमुश्किल हलक से निकल रहे थे, वह कहे जा रही थी, उसके लिए मत रोना, मेरा मेजर हीरो है...मेरा मेजर हीरो है...।