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पुलवामा हमले में शहीद पति का पार्थिव शरीर देख पत्नी ने कानों में कहा था- आई लव यू, नम हुई थी हर आंख

Thu, 15 Aug 2019 09:07 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
मेजर तेरा ये बलिदान, याद करेगा हिंदुस्तान। भारत माता की जय। पाकिस्तान मुर्दाबाद... जैसे नारों के बीच तिरंगे में लिपटे शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल के पार्थिव शरीर को उनके डंगवाल मार्ग स्थित आवास पर लाया गया था। पति के शव के पास बैठी पत्नी बार-बार उनके कानों में 'आई लव यू' कहते दिख रही थीं। यह देख हर किसी की आखें नम हो गई। हरिद्वार के खड़खड़ी घाट में शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल का अंतिम संस्कार किया गया।
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पत्नी निकिता कौल
शहीद की पत्नी, मां, दादी और बहनों ने उनके आखिरी दर्शन किए और श्रद्धांजलि दी। अंतिम दर्शन के समय पत्नी ने शहीद की तस्वीर को नमन किया। फिर उनके पार्थिव शरीर को चूमा, 'आई लव यू' कहा और एक टक देखती रहीं। उन्होंने खुद पति की अंतिम यात्रा की अगुआई की और कहा था कि जो चले गए उनसे कुछ सीखें, दुनिया में जो शहादत देते हैं, उनसे सीखना चाहिए।
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इसके बाद शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया। जहां से अंतिम यात्रा हरिद्वार के लिए प्रस्थान कर गई। डंगवाल रोड निवासी स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल के पुत्र मेजर विभूति कुमार ढौंडियाल 18 फरवरी को पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। वे 55 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे।

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मेजर विभूति 34 वर्ष के थे। अप्रैल 2018 में ही उनका विवाह फरीदाबाद निवासी निकिता कौल से हुआ था। निकिता कश्मीर विस्थापित परिवार से ताल्लुक रखती हैं और दिल्ली में नौकरी करती हैं। मेजर विभूति जनवरी के पहले सप्ताह में अप्रैल में शादी की पहली सालगिरह पर देहरादून आने का वादा कर ड्यूटी पर गए थे।
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18 फरवरी की सुबह उनकी शहादत की खबर पत्नी निकिता कौल के फोन पर मिली। निकिता उस समय दिल्ली जा रही थीं। खबर सुनकर किसी तरह उन्होंने मेजर विभूति की मां सरोज ढौंडियाल को फोन पर उनके पैर में गोली लगने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी। वह दिल की मरीज हैं, इसलिए उन्हें काफी देर बाद बेटे के शहादत की खबर दी गई थी।
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शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे। पिता स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल का 2012 में निधन हो चुका है। वे रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (वायुसेना) देहरादून में ऑडिटर के पद पर तैनात थे। 
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