शहीद बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर मां सरोज पर टूटा दुखों का पहाड़
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सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे नीतिका के फोन की घंटी बजी। पहले सोचा कि मेजर का फोन है। फोन नंबर मेजर का ही था। लेकिन, बात करने वाले मेजर नहीं, सेना के अधिकारी थे। फोन के ईयरपीस से उभर रहे एक-एक शब्द उसके कानों में बिघलते शीशे की तरह उतरते चले गए। आंखों के सामने अंधेरा छाता चला गया, अंतहीन अंधेरा।