प्रतापपुर बस स्टैंड से वह वापस घर आए और स्लीपिंग बैग, जिसे वह ले जाना भूल गए थे, उसे ले गए। दीवान सिंह आज भी फख्र से कहते हैं कि बेटे वीरेंद्र ने शहादत देकर उनका नाम ऊंचा कर दिया है...। दीवान कहते हैं कि मेरी छाती आज के दिन ही टूटी थी... लेकिन उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है...।