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पुलवामा हमला: पति को याद कर भर आई पत्नी की आंखें, बोलीं- बच्चे रोज पूछते हैं पापा कब आएंगे... 

Fri, 14 Feb 2020 11:18 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खटीमा
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बच्चे रोज पूछते हैं.. पापा कब आएंगे..। उन्हें क्या जवाब दूं...। उनसे बहाना बनाती हूं कि पापा भगवान के पास गए हैं। भगवान जब भेजेंगे तभी...। दिन कैसे कटते हैं यह मैं ही जानती हूं... वीरांगना रेनू राणा की आंखें भर आईं..। पुलवामा अटैक के शहीद 45 सीआरपीएफ के जवान वीरेंद्र सिंह राणा की पुण्यतिथि के लिए दो दिन का अवकाश लेने की बात कहते हुए वीरांगना ने बताया कि उन्हें 31 अक्तूबर 2019 से तहसील में अनुसेवक की नौकरी मिल गई है। 
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राज्य सरकार से 25 लाख मिले और सीआरपीएफ से पेंशन मिल रही है। उनका पुत्र बियान नर्सरी और पुत्री रूही यूकेजी में पढ़ रही है। वह दो माह से तहसील के सरकारी आवास में बच्चों के साथ रह रही हैं। रेनू कहती हैं कि आखिरी बार जब उनसे बात हुई थी तो उन्होंने (वीरेंद्र ने) यही कहा था कि रास्ते में हूं और अब पुलवामा पहुंचकर फोन करूंगा...। वीरांगना रेनू कहती हैं कि गर्व है कि उनके पति देश के काम आए...। 
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पिता को भी बेटे की शहादत पर गर्व है। कहते हैं ‘हम महाराणा प्रताप के वंशज हैं, हमारी रगों में देशभक्ति दौड़ती है। मेरे बेटे ने देश के लिए शहादत दी है, मुझे वीरेंद्र पर गर्व है..।’ यह बोलते-बोलते शहीद के 82 वर्षीय पिता दीवान सिंह राणा की आंखें नम हो गईं। 

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- फोटो : अमर उजाला
कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए भीषण आतंकी हमले को शुक्रवार को एक साल पूरा हो जाएगा। इस हमले में शहीद हुए 44 जवानों में मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी वीरेंद्र सिंह भी थे। पुण्यतिथि पर शहीद की वीरांगना रेनू देवी तहसील से दो दिन का अवकाश लेकर अपने दोनों बच्चों तीन वर्षीय पुत्र बियान और साढ़े पांच वर्षीय पुत्री रूही राणा के साथ गुरुवार सुबह घर आ गई हैं। 
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- फोटो : अमर उजाला
आंगन में शहीद के पिता दीवान सिंह राणा (82) ने अमर उजाला से बातचीत की। बताया कि तीन भाइयों में बड़ा बेटा जयराम बीएसएफ में चयनित हुआ। उसके बाद वीरेंद्र ने सीआरपीएफ को देशसेवा के लिए चुना। 12 फरवरी 2019 की शाम वीरेंद्र 20 दिन की छुट्टी के बाद जम्मू के लिए रवाना हुए। 
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प्रतापपुर बस स्टैंड से वह वापस घर आए और स्लीपिंग बैग, जिसे वह ले जाना भूल गए थे, उसे ले गए। दीवान सिंह आज भी फख्र से कहते हैं कि बेटे वीरेंद्र ने शहादत देकर उनका नाम ऊंचा कर दिया है...। दीवान कहते हैं कि मेरी छाती आज के दिन ही टूटी थी... लेकिन उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है...। 
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