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पढ़िए, कैसे एक चुनाव की हार ने यूपी के CM को बना दिया था योगी

Mon, 20 Mar 2017 09:26 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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तस्वीरें
उत्तराखंड के छोटे से कस्बे कोटद्वार में 1991 के छात्र संघ चुनाव में यदि योगी आदित्यनाथ को हार का सामना नहीं करना पड़ता, तो शायद वक्त उन्हें आज योगी की पहचान के साथ इस बुलंदी पर नहीं ले जा पाता। कोटद्वार डिग्री कालेज में मिली इस छोटी सी हार ने उनके सामने भविष्य का सुनहरा रास्ता खोल दिया।

 
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योगी
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के लाल महंत योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड का कोई मुख्यमंत्री बना हो। गोविंद वल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और एनडी तिवारी यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

 
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योगी आदित्यनाथ
​पांच जून 1972 को पौड़ी गढ़वाल के पंचेर गांव में नंद सिंह बिष्ट के घर योगी का जन्म हुआ था। उनका वास्तविक नाम अजय मोहन सिंह है। गढ़वाल विश्वविद्यालय से उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे। 22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना परिवार त्याग दिया और गोरखपुर चले गए।
 

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योगी आदित्यनाथ
​बाद में गोरखपुर में महंत अवैद्यनाथ के समाधिस्थ होने पर वह गोरक्षपीठाधीश्वर बने। बारहवीं लोक सभा (1998-99) में मात्र 26 वर्ष की आयु में वह सबसे कम उम्र के सांसद बने।
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योगी आदित्यनाथ
1991 के छात्र संघ चुनाव में पराजय के बाद वे इस कदर आहत हो गए, कि उन्होंने अपने मामा महंत अवैद्यनाथ को पत्र लिखकर गोरखपुर बुलाने का अनुरोध किया। गोरखपुर पहुंचने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अजय बिष्ट से योगी आदित्यनाथ होकर आज यूपी के सीएम तक का सफर कर लिया।
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योगी आदित्यनाथ
यमकेश्वर ब्लाक के पंचुर गांव से कोटद्वार योगी बीएससी की पढ़ाई के लिए आए थे। शुरू में अंतर्मुखी स्वभाव के योगी इस कस्बे में अपनी पहचान बनाना चाहते थे। इसलिए सरल सहज रास्ता छात्र संघ का चुनाव लगा। एबीवीपी से वे जुडे़ हुए थे, मगर टिकट उन्हें नहीं मिल पाया। एबीवीपी ने महासचिव पद पर दीप प्रकाश भट्ट को टिकट दिया, तो समर्थकों के कहने पर योगी बागी होकर चुनाव लड़ गए। इस चुनाव में योगी को बुरी तरह पराजय मिली और वे पांचवें नंबर पर रहे।
 
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योगी आदित्यनाथ
इस चुनाव में अरुण तिवारी को जीत हासिल हुई थी। इस हार ने जिंदगी में बड़ी जीत के उनके रास्ते खोल दिए। हालांकि इस बीच ऐसा वाक्या भी हुआ, जिसने उनके मन में उदासी को और ज्यादा भर दिया। गैरेज रोड पर उनके छोटे से किराये के कमरे में चोरों ने एक दिन हाथ साफ कर दिया। पुलिस में रिपोर्ट लिखाने तक के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ी। उस वक्त के उनके सहयोगी और वर्तमान में पाली लंगूर में प्रवक्ता पदमेश बुड़ाकोटी को योगी से जुड़ी कई सारी बातें याद हैं।
 

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योगी आदित्यनाथ - फोटो : SELF
बकौल-बुड़ाकोटी, चुनाव में हार और घर में चोरी से निराश योगी ने महंत अवैद्यनाथ को चिट्ठी लिखकर अपने पास बुलाने के लिए कहा था। 1992 में वह गोरखपुर चले गए और फिर वहीं के होकर रह गए। कोटद्वार कालेज में योगी जितना भी समय रहे, बेहद सादगी से रहे। हालांकि आगे बढ़ने की एक ललक उनमें हमेशा दिखती रही। 1991 के कोटद्वार कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष रहे विनोद रावत के मुताबिक, योगी ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों से होकर वह गुजरे और अपना अलग मुकाम बनाया।
 
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योगी
गोरखपुर में महंत अवैद्यनाथ के पास पहुंचने के बाद आदित्यनाथ ने बाकायदा दीक्षा ली। फिर अपने पिता को यमकेश्वर चिट्ठी भेजी, जिसमें सारी स्थितियों को सामने रखा। उन्होंने बताया कि उनके स्तर पर दीक्षा ले ली गई है और अब अजय बिष्ट मर गया है। योगी आदित्यनाथ का ही अब अस्तित्व है।
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