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Kedarnath: आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के दर्शन करना नहीं भूले प्रधानमंत्री मोदी, जुड़ी हैं बहुत खास यादें

Fri, 21 Oct 2022 09:55 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
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केदारनाथ में पीएम मोदी - फोटो : Twitter @pushkardhami
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केदारनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास किया। इसके बाद वे आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के दर्शन के लिए गए। साल 2017 में जब पीएम मोदी केदारनाथ आए थे तो उन्होंने कहा था कि शंकराचार्य की प्रतिमा भव्य और दिव्य होगी। इसके बाद पिछले साल ही पीएम मोदी ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। इस बार वे जब आए तो प्रतिमा को नमन करना नहीं भूले।

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केदारनाथ धाम में बनी आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा पीएम मोदी के लिए बहुत खास रही है। 2013 की आपदा में केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल और उनकी मूर्ति मंदाकिनी नदी के सैलाब में तबाह हो गई थी।

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आदिगुरू शंकराचार्य की मूर्ति - फोटो : ANI
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि विशेष डिजाइन से तैयार की गई है। यह भगवान केदारनाथ के मंदिर के पास छह फीट नीचे खुदाई कर बनाई गई है। 
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केदारनाथ में पीएम मोदी - फोटो : Twitter @pushkardhami
आदिगुरु शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची मूर्ति कृष्णशिला पत्थर पर बनाई गई है। मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी ने 120 टन के पत्थर पर शंकराचार्य की प्रतिमा को तराशा था। छेनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसका वजन लगभग 35 टन है। इस मूर्ति को बनाने के लिए योगीराज को नौ महीने तक प्रतिदिन 14-15 घंटे काम करना पड़ा था। 

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अनावरण से पहले केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य की मूर्ति - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
प्रतिमा की चमक के लिए उसे नारियल पानी से पॉलिश किया गया है। बता दें कि समाधि का निर्माण 36 मीटर गोलाकार में किया गया है जिसकी गहराई छह मीटर है। समाधि तक प्रवेश व निकासी के लिए अलग-अलग 3 मीटर चौड़े व 40 मीटर लंबे दो रास्तों का निर्माण किया गया। 
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केदारनाथ में पीएम मोदी - फोटो : Twitter @pushkardhami
आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा निर्माण के लिए देश भर के मूर्तिकारों की ओर से अपना मॉडल पेश किया गया था। जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से योगीराज शिल्पी को प्रतिमा तैयार करने के लिए अनुबंध किया गया था। 
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