प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिश्ता उत्तराखंड से काफी पुराना है। वैसे तो वे केदारनाथ धाम में दूसरी बार आ रहे हैं। लेकिन पीएम बनने के बाद वे तीन मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर पहली बार आ रहे हैं।
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बता दें कि वर्ष 2013 में आई आपदा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी आपदा प्रभावितों के लिए मसीहा बनकर उतरे थे। उत्तराखंड में आपदा प्रभावितों के लिए उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
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बता दें कि उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। आपदा के दौरान बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए केदारनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पीएम मोदी ने ही रखा था।
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उस वक्त उन्होंने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया था। मोदी ने संकट के वक्त पर्यटकों और श्रद्धालुओं की मदद करने के लिए उत्तराखंड के लोगों की भरपूर सराहना की।
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क़ुदरत का कहर झेल रहे केदारनाथ धाम में उस वक्त उन्होंने केवल एक दिन में उत्तराखंड में फंसे 15000 गुजरातियों को सुरक्षित निकाल लिया था।
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हैदराबाद में आयोजित रैली में भी मोदी ने उत्तराखंड के दैवीय आपदा पीड़ितों की मदद के लिए पांच रुपये का टिकट लगाकर धनराशि एकत्र करने के लिए जनता से अपील की थी।
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गुजरात के मुख्यमंत्री रहते ही मोदी आपदा के तुरंत बाद दो दिन के लिए उत्तराखंड आए थे। लेकिन उसी समय केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने प्रभावित क्षेत्र में किसी भी मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री के हेलीकाप्टर की लैंडिंग पर ही पाबंदी लगा दी।
हालांकि उस वक्त उन्होंने उत्तराखंड में आई इस आपदा को प्राचीन धारीदेवी मंदिर व गंगा की अविरल धारा से छेड़छाड़ का नतीजा बताया था। लेकिन मोदी के द्वारा दिए गए पुननिर्माण के प्रस्ताव को उस समय कांग्रेस सरकार ने स्वीकार नहीं किया।