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बारिश के कहर से एक पल में बिखर गया आशियाना, तस्वीरों में देखिए तबाही का मंजर

Sun, 30 Jul 2017 09:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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उत्तराखंड में बारिश का कहर ऐसा बरपा क‌ि पल भर में आश‌ियाना ब‌िखर गया। पूरे गांव में ऐसा माहौल हो गया जैसे वहां कोई रहता ही न हो। तबाही का ऐसा मंजर देख लोग भी सदमे में आ गए। तस्वीरों में देख‌िए...
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के धनपुर पट्टी के पीड़ागांव में अतिवृष्टि से एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि दो आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रभावितों की गोशाला टूटने से उसमें बंधे चार मवेशी भी दब गए हैं। पीड़ित परिवारों ने अन्यत्र शरण ली हुई है। 
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धनपुर पट्टी के पीड़ा गांव के खरपाणी तोक में शुक्रवार रात को हुई अतिवृष्टि के कहर ने प्रभावित दयाल सिंह के परिवार को एक पल में बेघर कर दिय। वर्षो की मेहनत से बनाया पीड़ित का चार कमरों का घर, मलबे के सैलाब में तबाह हो गया है। जबकि मोहन सिंह, रमेश सिंह के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 

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अतिवृष्टि से मोहन सिंह की गोशाला टूने से उसमें बंधी भैंस, गाय व उसका बछड़ा दब गए।  घर का बिखरा सामान आपदा की तबाही को बयां कर रहा है। खेती-बाड़ी और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले दयाल सिंह अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ छोटे भाई के घर में शरण लिए हुए हैं। 
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खून-पसीने की मेहनत से 12 वर्ष पूर्व स्वयं मिट्टी-पत्थर एकत्रित कर दिनरात काम करते हुए चार कमरों का मकान बनाया। चार बच्चों के साथ नए घर में दिन अच्छे से गुजर रहे थे। बीते वर्षो में दो बेटियों के विवाह भी कर दिया। अब, एक बेटा व एक बेटी और पति-पत्नी घर में रह रहे थे। मजदूरी कर आजिविका अच्छी हो रही थी। 
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लेकिन शुक्रवार रात्रि को हुई अतिवृष्टि से पीड़ित को परिवार सहित हाशिए पर ला दिया है। मलबे के ढेर में ध्वस्त आवासीय मकान के अंदर का राशन, कपड़े और अन्य जरूरी वस्तुएं पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। एक भी सामान ऐसा नहीं है, जिसे उपयोग में लाया जा सके। वर्षो की मेहनत से बना आशियाना आंखों के सामने मलबे का ढेर बना हुआ है। 
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पीड़ित की पत्नी का कहना है कि अब अच्छे दिनों की उम्मीद दिख रही थी। लेकिन शायद हमारी किस्मत में ठोकरें खानी लिखी हैं। इधर, पीड़ित के भाई मोहन सिंह भी खेतीबाड़ी और पशुपालन से परिवार की आजिविका चला रहे थे। लेकिन अतिवृष्टि ने उनकी दो दुधारू भैंस और गाय को छिन लिया, जिससे आर्थिकी पर भी संकट के बादल घिर गए। ग्राम प्रधान का कहना है कि खरपाणी तोक रहने लायक नहीं रह गया है। अतिवृष्टि से पूरी जमीन प्रभावित हुई हैं। जगह-जगह दरारें पडने से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
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