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जागर गायन को दुनिया में पहचान दिलाने वाली बसंती को पद्मश्री

Fri, 27 Jan 2017 10:28 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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बसंती बिष्ट - फोटो : AmarUjala
पहाड़ के घर-घर में गाए जाने वाले मां भगवती नंदा के जागरों को देश-विदेश तक पहुंचाने वाली बसंती बिष्ट को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।
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Basanti Bisht - फोटो : AmarUjala
जागर को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाली बसंती बिष्ट नाम प्रदेश की पहली प्रोफेशनल महिला जागर गायिका होने का भी रिकॉर्ड है।
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Basanti Bisht - फोटो : AmarUjala
घर की दहलीज लांघकर दुनियाभर के मंचों पर मां नंदा के जागरों की जीवंत प्रस्तुति देने वाली बसंती बिष्ट न केवल उत्तराखंडी लोक संस्कृति का चेहरा हैं बल्कि, महिला सशक्तिकरण की पहचान भी हैं।

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Basanti Bisht - फोटो : file photo
मूलत: देवाल (जिला चमोली) के ल्वाणी गांव में जन्मी बसंती ने अपनी मां विरमा देवी से मांगल और जागर गायन सीखा। पहाड़ में नंदा को बेटी का रूप माना जाता है। भगवान शिव से उनके विवाह और मायके कैलास की यात्रा को कई सुंदर जागरों के रूप में पिरोया गया है।
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Basanti Bisht - फोटो : AmarUjala
अलग-अलग अवसरों पर इन जागरों को गाने की परंपरा है। हर 12 वर्ष में उनकी मायके कैलास विदाई को नंदा देवी राज जात यात्रा के रूप में भव्य स्तर पर आयोजित किया जाता है।
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Basanti Bisht - फोटो : AmarUjala
बसंती बिष्ट ने इन्हीं पारंपरिक जागरों को मूल स्वरूप बदले बिना ना केवल बेहतर बनाया बल्कि उसे पूरी दुनियाभर में प्रचारित और प्रसारित भी किया।
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