समुद्र की गहराई से पेट्रोल पंप तक तेल कैसे पहुंचता है। इस सवाल का जवाब आपको देहरादून स्थित ओएनजीसी के तेल संग्रहालय में मिल सकता है। तेल संग्रहालय में गहरे समुद्र तल से गैस और पेट्रोलियम निकालने की तकनीक को प्रदर्शित किया है। ऑन शोर गतिविधियां क्यां और ऑफ शोर ड्रिलिंग कैसे होती है इसकी विस्तृत जानकारी विज्ञान में रूचि रखने वालों को यहां मिल सकती है।
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संग्रहालय में प्रवेश करते ही ग्राउंड फ्लोर पर एक बेहद आकर्षक व सुंदर पेंडुलम घूमता रहता है। वह यह दिखाता है कि भूमि किस तरह घूमती रहती है। इसको फूको पेंडुलम के नाम से भी जाना जाता है। फ्रांसिसी भौतिकी वैज्ञानिक फाउकाल्ट ने इस सत्य को उद्घाटित किया था। इसमें धरती किस तरह सूर्य का चक्कर काटती है कोई भी साधारण व्यक्ति सरलता से जान लेता है।
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क्रूड ऑयल दरअसल है क्या। इसमें क्या क्या हैं। कौन कौन से रसायनिक तत्व इसमें होते हैं यह सारी जानकारी यहां मिलती है। हाईड्रोजन व कार्बन से कैसे तेल बना होता यह आसानी से पता चल जाता है।
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क्रूड ऑयल भी अलग अलग तरह का होता है। हर स्थान पर क्रूड ऑयल खास प्रकार का होता है। आम तौर पर क्रूड ऑयल काला दिखता है और इसे ब्लैक गोल्ड के नाम से जाना जाता है। इसे तरल सोना बोला जाता है। इस बोर्ड में इस लिक्विड गोल्ड का सारा ब्यौरा मिलता है।
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इस बोर्ड में छात्र अथवा कोई भी जिज्ञासु तेल क्षेत्र के बारे में सूक्ष्म से सूक्ष्म अमह जानकारी प्राप्त कर सकता है। क्विज गेम खेला जा सकता है।
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ड्रिलिंग सेक्टर एडविन लावरेनटिन ड्रेक नाम के शख्स के योगदान के बारे में भी यहां जानकारी मिल जाती है। यही वह व्यक्ति था जिसने ऑयल-गैस ड्रिलिंग में इंकलाब किया था। उनके बारे में सविस्तार जानकारी दी गई है।
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देहरादून स्थित ओएनजीसी के संग्रहालय में भूगर्भीय शोध के बारे में तमाम शानदार मॉडल हैं, जिनको बेहद सरल और आम लोगों के समझने के हिसाब से तैयार किया है। मैरीन व फ्रेश वॉटर के दो एक्युरियम आकर्षण का केंद्र हैं। 2 डी व 3 डी थियेटर ओएनजीसी का स्वर्णिम इतिहास व उपलब्धियों को दर्शाते हैं। तेल की खोज में कितना जोखिम होता है और सुरक्षात्मक उपाय कैसे कैसे होते हैं उनके विवरण हैं।
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lalit singh martolia
ओएनजीसी व तेल क्षेत्र फिल्म में तेल के इतिहास, कर्नल ड्रेक के योगदान, भूगर्भ विज्ञान की अहमयित, शोध, ड्रिलिंग, मैकेनिकल, कैमिकल इंजीनियरिंग व रसायनशास्त्र के योगदान को दिखाया जाता है। भूवैज्ञानिकों के महत्व के बारे में भी फिल्मों में बताया जाता है।
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सुबीर राहा ऑयल म्युजियम में हेड ललित सिंह मार्तोलिया हैं। वहीं अधिकारी डीसी ममंगाई व एसके शर्मा संग्रहालय को विश्वस्तरीय बनाने के लिए जुटे रहते हैं। अन्य कार्मिक भी विज़न प्लान के अनुसार ही काम करते हैं। संग्रहालय के दूसरे तल पर रीगल रूम है जिसमें शाही परिवार के तमाम चित्र व पेंटिंग हैं। पूर्व व तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 14 नवंबर 2005 को इस संग्रहालय का उद्घाटन किया था।
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सुबीर राहा ऑयल म्यूजि़यम इमारत तेल भवन परिसर में है। इस खास संग्रहालय की इमारत भी ऐतिहासिक है। यह महाराजा पटियाला राजा भूपिंदर सिंह का महल हुआ करता था। ओएनजीसी ने पहले लीज़ पर और बाद में इसको 1957 में महारानी यदुनंदा कुमारी से खरीद लिया था। तीस एकड़ में फैले क्षेत्र में ओएनजीसी के पहले चेयरमैन केशवदेव मालवीय मालवीय का कार्यालय भी हुआ करता था।
ललित सिंह मार्तोलिया ओएनजीसी सुबीर राहा ऑयल म्यूजि़यम के हेड व ग्रुप जनरल मैनेजर (जीजीएम) हैं। इस सेक्टर में उन्हें 35 साल का अनुभव है। इसी साल फरवरी में उन्होंने संग्रहालय का जिम्मा संभाला है। यहां पर तैनाती से पूर्व मेहसाणा असैट के इंजीनियरिंग प्रमुख थे। मार्तोलिया के पास देश, विदेश का लंबा अनुभव तो है ही साथ में वह तकनीकी क्षेत्र व मानव प्रबंधन के महारथी माने जाते हैं। सुबीर राहा ऑयल म्युजि़यम को विश्वस्तरीय से भी आगे बनाने के लिए वह बड़ी कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। उनके पास सपना है और उसको पूरा करने का खाका भी उनके पास मौजूद है।