हरिद्वार में स्वामी शिवानंद के विवादित बोलों ने संत जगत में हलचल मचा दी है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि योग से इंसान में बलात्कार की प्रवृत्ति बढ़ रही है। गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए खनन के विरोध व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पिछले करीब दो दशकों से काम कर रहे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा कि योग के नाम पर कराए जा रहे हठयोग से समाज में दुराचार की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
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उन्होंने कहा कि इस तरह की क्रियाओं से मनुष्यों में जानवरों से गुण पैदा हो रहे हैं। जानवरों जैसी गतिविधियां इसी का परिणाम हैं। बुधवार को मातृसदन में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने यह बात कही।
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स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि आज बड़े पैमाने पर योग कराया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि महज आसन कराया जाना योग नहीं है। इसे उन्होंने हठयोग बताया। कहा कि योग ऋषि पतंजल का योग सही मायने में ज्ञान योग और कर्म योग पर आधारित रहा है।
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आज योग के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कराई जा रही हैं, जिससे मनुष्य जानवरों की तरह व्यवहार करता है। फलस्वरूप उसमें जानवरों के ही गुण आ रहे हैं। जिससे समाज में दुराचार जैसी गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि योगी को संचय से दूर रहना चाहिए। मगर आज कोई भी योगी ऐसा नहीं है, जो संचय न करता हो।
हालांकि बाद में जब मीडिया कर्मियों ने स्वामी शिवानंद से कैमरे पर बाइट लेनी चाही तो उन्होंने शब्दों में थोड़ा फेरबदल कर कहा कि उनका आशय किसी व्यक्ति और संस्था विशेष पर नहीं है। वह तो समाज में सामने आ रही कुछ गतिविधियों के बारे में यह बात कह रहे हैं।