पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग तहसील स्थित पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर पाताल भुवनेश्वर में सरकारी तंत्र की अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों की जान पर भारी पड़ सकती हैं। पाताल भुवनेश्वर गुफा धार्मिक और पर्यटन की प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां आपातकालीन जैसी कोई सुविधा नहीं है। गुफा में आक्सीजन की कमी है। घुटन और घबराहट महसूस होने पर गुफा के अंदर तक मदद पहुंचाने का कोई जरिया और जीवन रक्षक दवाएं तक नहीं हैं।
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देवभूमि के 'पाताल लोक' में नहीं कोई आपात काल
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patal bhubaneswar cave
पाताल भुवनेश्वर गुफा का पौराणिक इतिहास है। स्कंद पुराण में गुफा का उल्लेख है। किंवदंती है गुफा की खोज त्रेता युग में हुई। जगत गुरु शंकराचार्य समेत कई धर्मगुरु भी इस गुफा तक पहुंचे। गुफा के प्रवेश द्वार से पाताल लोक के लिए 84 सीढ़ियां हैं। सीढ़ियां सीधे जमीन के अंदर जाती हैं। सीढ़ियां खत्म होते ही गुफा के भीतर काफी बड़ा मैदान है।
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गुफा में भगवान भोले नाथ का कंबल, ऐरावत हाथी के पांव, सिर मुड़ा गरुड़, कौरव और पांडवों का जुआ चौपड़, शिवलिंग, दुग्ध का कुंड, स्वर्ग की सीढ़ी, चारों युगों के प्रतीक शिला समेत कई प्राकृतिक आकृतियां हैं। कलियुग का प्रतीक शिला सबसे बड़ी और सतयुग की सबसे छोटी है। कहा जाता है कि कलियुग की शिला सदियों में धीरे-धीरे बढ़ रही है। जब शिला गुफा के भीतर बनी चट्टान से मिल जाएगी तभी कलियुग खत्म होगा।
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गुफा पुरातत्व विभाग के अधीन और संरक्षित है। सैकड़ों लोग रोजाना गुफा में दर्शनों को जाते हैं। प्रत्येक यात्री से टिकट भी लिया जाता है। गुफा के अंदर जाने और बाहर आने के लिए एक ही प्राकृतिक रास्ता है। प्रवेश द्वार काफी संकरा है। गुफा में आक्सीजन की कमी और तापमान काफी कम रहता है।
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देवभूमि के 'पाताल लोक' में नहीं कोई आपात काल
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बरसात होने से आक्सीजन की कमी बढ़ जाती है। जिससे गुफा के अंदर घुटन और घबराहट महसूस होती है। दमा, बीपी, हार्ट के मरीजों के लिए गुफा की यात्रा बेहद खतरनाक है। गुफा के भीतर जाने पर किसी यात्री को घुटन और घबराहट महसूस होती है तो उसे बाहर निकालने और जीवन रक्षक दवाएं पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। गुफा के भीतर से बाहर संपर्क करने के लिए वायरलेस की सुविधा तक नहीं है।
गुफा के अंदर जाने वालों का मोबाइल और सामान बाहर ही जमा करवा लिया जाते हैं। बिजली गुल होने पर गुफा में अंधेरा छा जाता है। जनरेटर शुरू होने तक यात्री अंधेरे में डरे और सहमे रहते हैं। पत्थरों की सीढ़ियां भी बेहद फिसलन भरी हैं। सीढ़ियां उतरने और चढ़ने के लिए सहारा देने के लिए जंजीरें लगी हैं। बीच में एक तरफ से जंजीर भी टूटी है। कटकट काउंटर में सुझाव पुस्तिका तक नहीं है।