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चुनावी समर में उतरने को बेताब नेताओं की दूसरी पीढ़ी, तस्वीरों में देखें...

Thu, 15 Sep 2016 03:09 PM IST
कृष्णेन्दु, अरविन्द सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
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leaders
आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की दूसरी पीढ़ी चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी में है। हालांकि अभी तक किसी ने लिखित में तो दावेदारी नही की है, मगर चुनाव लड़ने की तैयारी पर खुलकर बोलने में किसी को गुरेज नहीं है। अमर उजाला ने नेता पुत्रों की चुनावी तैयारियों से जुड़ी गतिविधियों के मद्देनजर इन्हें टटोला तो एकाध को छोड़कर दूसरी पीढ़ी के इन राजनीतिज्ञों ने खुले तौर पर दावा कर दिया है कि यदि उन्हें पार्टी टिकट देती है तो उनकी पूरी तैयारी है। आइए चुनावी समर में उतरने को बेताब इन नेताओं के राजनीतिक प्रोफाइल और उनके दावों पर नजर डालते हैं...
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anand rawat
आनन्द रावत:
सीएम के छोटे बेटे आनन्द रावत भी विधानसभा पहुंचना चाहते हैं। नशा रोकने, परंपरागत खेल, छात्र मुद्दों के जरिए लोगों के बीच पैठ बनाने की उनकी कोशिश किसी से छुपी नहीं है। वे चुनाव लड़ने की संभावना से इंकार भी नहीं करते। इन दिनों वे घूम फिरकर कुमाऊं में ही नजर आते हैं। माना जा रहा है कि कुमाऊं में ही पिता की राजनीतिक विरासत की छांव में विधानसभा पहुंचने की राह बनाएंगे। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र उनके दिल के करीब है। अब वे लालकुंआ से ही लडेंगे या कहीं और से ये खुलासा वे नहीं करते। आनन्द कहते हैं कि वे जिस पृष्ठभूमि से हैं, चुनाव तो लड़ेंगे ही। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि मुझे इतनी जल्दी नहीं, दरअसल मैं केवल विधायक नहीं लीडर बनना चाहता हूं। उसके लिए मैं खुद को लगातार तैयार कर रहा हूं।
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anupama
अनुपमा रावतः
सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत भी विधानसभा चुनाव में उतरने को तैयार हैं। अनुपमा पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए वह हरिद्वार में किसी सीट से चुनाव लड़ सकती है।चर्चा है कि सीएम रावत वैसे खुले तौर पर तो नही लेकिन अंदरूनी तौर पर बेटी अनुपमा के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेसी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं की भारी-भरकम  टीम उनके लिए हरिद्वार में अभी से ही काम कर रही है। अनुपमा चुनाव तो लड़ना चाहती हैं, मगर वह मीडिया फ्रैंडली नहीं है। यह उनकी कमजोरी साबित होगी या ताकत यह वक्त बताएगा।  

 

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sanjeev
संजीव आर्य:
कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य उत्तराखंड को-ऑपरेटिव  बैंक के अध्यक्ष है। उनके राजनीतिक अनुभवों पर नजर डाले तो इससे पूर्व वह 2005 से लेकर 2010 तक हल्द्वानी मंडी परिषद के अध्यक्ष रहे। साल 2013 से लेकर वे लगातार को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष हैं। संजीव को साल 2012 में ही बाजपुर सीट से चुनाव लड़ना था। लेकिन बाद में बाजपुर सीट से पिता यशपाल के सामने आने पर उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने का मन टाल लिया। बाद में चयन समिति ने उनका नाम नैनीताल सीट के लिए भेजा था। लेकिन अन्तत: इस सीट से सरिता आर्य को टिकट दिया गया। विधानसभा चुनाव को लेकर संजीव आर्य का कहना है कि यदि पार्टी टिकट देती है तो वह बाजपुर, नैनीताल दोनों जगह से चुनाव लड़ने को तैयार हैं। संजीव का कहना है कि पार्टी के प्रति उनके समर्पण और राजनीतिक अनुभवों को देखते हुए पार्टी को टिकट देना ही चाहिए।
 
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sumit
सुमित हृदयेशः
राजनीति में दूसरी पीढ़ी के नेताओं में शामिल सुमित हृदयेश को वैसे तो राजनीति विरासत में मिली है। मां इंदिरा हृदयेश पिछले तीन दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं। अविभाजित यूपी में यह 27 साल तके राजनीतिक परचम लहराने के बाद वर्तमान में वह हरीश रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। युवा कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत करने वाले सुमित वर्तमान में हल्द्वानी मंडी परिषद के अध्यक्ष है। संजीव की तर्ज पर सुमित के भी विधानसभा चुनाव में उतरने की खूब चर्चाएं हैं। वैसे मां इंदिरा हृदयेश साफ तौर पर कहती है कि कांग्रेस में परिवारवाद को बढ़ावा नहंी दिया जाना चाहिए लेकिन जब बारी बेटे के चुनाव मैदान में उतरने की आती है तो उनका कहना है कि यदि पार्टी टिकट देती है तो इसमें बुराई क्या हैं? दूसरी ओर सुमित का कहना है कि वह विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर पूरी तैयार है। वैसे तो वह हल्द्वानी सीट से टिकट चाहते है। लेकिन पार्टी चाहे तो कहीं से भी चुनाव मैदान में उतार सकती है। सुमित का यह भी कहना है कि पार्टी यदि चाहे तो उन्हें बागियों के खिलाफ भी चुनाव मैदान में उतार सकती है।
 
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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : amar ujala
रोहित शेखर तिवारी: 
पूर्व सीएम एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी भी अपने पिता की तर्ज पर उत्तराखंड की राजनीति में धमाल मचाना चाहते है। उन्होंने सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन उनकी मां उज्जवला शर्मा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर टिकट की दावेदारी कर दी है। बकौल पार्टी प्रदेश अध्यक्ष उपाध्याय पिछले दिनों पूर्व सीएम तिवारी से दिल्ली में मिले थे। पूर्व सीएम ने तो नही वरन पत्नी उज्जवला शर्मा ने बेटे के लिए नैनीताल सीट से चुनाव लडृ़ने के लिए टिकट की मांग कर दी। प्रदेश अध्यक्ष उपाध्याय के मुताबिक उनके इस आवेदन पर विचार भी किया जाएगा। 
 
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रितु खंडूड़ी भूषण:
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की बेटी रितु अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं। अपने पिता के राजनीतिक रसूख के सहारे वो विधानसभा में पहुंचने की कोशिश में हैं। रितु भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य भी हैं। वो पिता के साथ कई राजनीतिक कार्यक्रमों दिखाई भी देती हैं। रितु एक एनजीओ चलाती हैं जिसके मार्फत से वो लोगों को संपर्क में हैं। रितु की नजर आगामी विधानसभा चुनावों में बदरीनाथ, देवप्रयाग और श्रीनगर सीट पर है। रितु का कहना है कि मैं भाजपा की सदस्य हूं और पार्टी के लिए काम भी कर रही हूं। अगर पार्टी टिकट देती है तो मैं विधानसभा का चुनाव जरूर लड़ना चाहूंगी।  
 

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सौरभ बहुगुणा:
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की पुत्र सौरभ बहुगुणा सितारगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इस सीट से उनके पिता विजय बहुगुणा विधानसभा का उप चुनाव जीते थे। 18 मार्च के घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के नौ विधायकों के साथ उनकी सदस्यता विधानसभा अध्यक्ष ने रद्द कर दी थी। विजय बहुगुणा ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर रखा है। ऐसे में सौरभ सितारगंज से विधानसभा का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सौरभ का कहना है कि मैं पिछले चार साल से सितारगंज में काम कर रहा हूं। अगर पार्टी मुझे टिकट देती है तो मैं विधानसभा का चुनाव जरूर लड़ूंगा। 
 

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rajeev
राजीव कंडारी:
प्रदेश के पूर्व मंत्री मातवर सिंह कंडारी के पुत्र राजीव कंडारी देवप्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। राजीव लंबे अर्से से क्षेत्र में काम कर रहे हैं। 2012 के विधानसभा चुनावों में भी राजीव पार्टी टिकट के दावेदार थे। उन्होंने सहसपुर सीट से टिकट के लिए दावा ठोका था। लेकिन भाजपा ने उनके पिता मातवर सिंह कंडारी को रुद्रपुर से हरक सिंह रावत के लिए चुनाव लड़ाया था। राजीव कंडारी देव प्रयाग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा अगर उम्र वाले फामूर्ले के आधार पर मातवर सिंह कंडारी को टिकट नहीं देती है तो राजीव इसके लिए अपना दावा ठोकेंगे। राजीव कंडारी का कहना है कि उनकी ओर से तो तैयारी पूरी है, बाकी पार्टी पर निर्भर करता है कि वह टिकट किसको देती है।
 

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विनोद कंडारी:
पूर्व मंत्री मातवर सिंह कंडारी के भतीजे विनोद कंडारी भी देवप्रयाग विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के दावेदार हैं। विनोद ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरूआत की थी। इसके बाद वो युवा मोर्चा के दो बार प्रदेश उपाध्यक्ष, एक बार अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी उठा चुके हैं। वर्तमान में विनोद भाजपा के प्रदेश सचिव और चमोली जिला के प्रभारी हैं। उनका कहना है कि वो देवप्रयाग विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट पर अपना दावा ठोकेंगे। पार्टी अगर टिकट देती है तो मैं विधानसभा का चुनाव जरूर लड़ूंगा। 
 

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अमित कपूर:
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर के पुत्र अमित कपूर देहरादून कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में हैं। अमित कपूर भाजयुमो में सक्रिय हैं। अपने पिता की चुनावी कमान वहीं संभालते रहे हैं। अमित अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने की तैयारी कर रहे हैं। अमित का कहना है कि मैं देहरादून कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का दावा पेश करूंगा। उनका कहना है कि वो अपने पिता के बदले पार्टी से टिकट नहीं मांगेंगे उनकी कोशिश तो अपने पिता सहित टिकट के अन्य दावेदारों को चुनौती देनी की है। 
 

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मनींद्र कोश्यारी:
पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे मनींद्र कोश्यारी कपकोट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। मनींद्र, भगत सिंह कोश्यारी के राजनैतिक उत्तराधिकारी माने जाते हैं। कोश्यारी की चुनावी कमान भी मनींद्र संभालते हैं। हालांकि मनींद्र के विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना के सवाल को भगत सिंह कोश्यारी ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि मनींद्र के चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन पार्टी में इस बात को लेकर चर्चा है कि मनींद्र की योजना कपकोट से चुनाव लड़ने की है। 
 
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विनोद फोनिया:
पूर्व विधायक केदार सिंह फोनिया के पुत्र विनोद फोनिया भी भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयार कर रहे हैं। हालांकि 2012 के विधानसभा चुनावों में जब पार्टी ने केदार सिंह फोनिया को टिकट नहीं दिया था तो उन्होंने पार्टी छोड़ दिया था। केदार सिंह फोनिया और विनोद फोनिया भाजपा में शामिल होने की कोशिश में हैं। बढ़ती उम्र की वजह से केदार सिंह फोनिया चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन विनोद फोनिया भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं।
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