देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जब पहली बार वर्ष 1906 में दून आए तभी यहां के सौंदर्य पर मोहित हो गए थे।
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इस जेल में बैठकर चाचा नेहरू ने की 'भारत की खोज', तस्वीरें
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दून के हरिद्वार रोड स्थित जेल (जो अब सांस्कृतिक धरोहर है) में जवाहर लाल नेहरू को 1932, 1933 और 1934 में कुछ-कुछ अंतराल में कैद कर रखा गया था।
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आज भी यहां पर नेहरु जी का स्नानागार, रसोई, शौचालय मौजूद है। साथ ही वह कमरा भी है जहां देश का नेहरू सोया करते थे।
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यहीं पर जेल में रहने के दौरान उन्होंने भारत एक खोज (डिस्कवरी ऑफ इंडिया) के कई अंश भी लिखे।
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इतना ही नहीं बहुत कम लोगों को पता है कि नेहरू अंतिम बार अपनी मृत्यु से एक दिन पहले 26 मई को दून आए थे। ये उनका आखिरी दौरा था। वह यहां के सर्किट हाऊस में कुछ देर के लिए रुके। उसके बाद वह और इंदिरा गांधी और अन्य परिजन सहस्त्रधारा गए। (फाइल फोटो- सहस्त्रधारा)
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यहां गंधक की जल और धारा में उन्होंने स्नान किया। आज जो लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस है वहां पर उन्होंने विश्राम किया और भोजन भी वहीं किया। यहां से वह दिल्ली गए। 27 मई को सुबह छह बजे तीन मूर्ति भवन में उन्हें दिल का दौरा पड़ा। दोपहर दो बजे के करीब उनकी मृत्यु हो गयी थी। (दून की जेल जिसमें नेहरू जी रहे का एक गेट)
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दुखद बात यह है कि अभी तक किसी सरकार ने वहां पर कोई स्मारक वगैरह नहीं बनवाया है। बहुत कम लोगों को पता है कि नेहरू यहां अंतिम बार आए थे। खैर ये तस्वीर देखें तो आप समझ जाएंगे कि नेहरू की विरासत का कितना ख्याल रखा जा रहा है। ये तस्वीर कांग्रेस भवन जिसे आज राजीव भवन कहते हैं उसके बमुश्किल पचास कदम की दूरी पर जवाहर लाल नेहरू की मूर्ति की है।