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इसी जगह शिव ने पिया था समुद्र मंथन से निकला विष, कहलाए नीलकंठ

Wed, 31 Aug 2016 07:54 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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neelkanth mahadev
समुद्र मंथन हलाहल के दौरान जब हलाहल निकला तो देवता और असुर भागने लगे। तब शिवजी ने संसार को बचाने के लिए पूरा विष पी लिया। लेकिन क्या आप जानते हैं जहां शिवजी ने विष पिया वो जगह आज ‌कैसी दिखती है।
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जिस जगह भगवान शिव ने विषपान किया, वहां आज एक भव्य मंदिर स्‍थापित किया गया है।
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ऋषिकेश के जंगलों के बीच स्थित इस जगह पर मन्नत मांगने देश विदेश से भोले के भक्त पहुंचते हैं।

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तीर्थनगरी ऋषिकेश में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के बारे में मान्यता है कि शिवजी ने यहां समुद्र मंथन के दौरान निकले विष (हलाहल) ग्रहण किया था। यहीं से शुरू हुई ‌उनके नीलकंठ बनने की कहानी....
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यहां विष पीने के बाद शिवजी का गला नीला पड़ गया था, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाता है।
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नीलकंठ महादेव मंदिर की नक्काशी देखते ही बनती है। मंदिर शिखर के तल पर समुद्र मंथन के दृश्य को चित्रित किया गया है।
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मंदिर के गर्भ गृह के प्रवेश-द्वार पर एक विशाल पेंटिंग में भगवान शिव को विष पीते हुए भी दिखलाया गया है।
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ऋषिकेश से स्वार्गाश्रम, लक्ष्मण झूला, नीलकंठ रोड, मौनी बाबा की गुफा से होकर आप नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंच सकते हैं। अगर आप अपने वाहन से जाना चाहते हैं तो ऋषिकेश बैराज-लक्ष्मण झूला मार्ग से सीधे नीलकंठ जा सकते हैं। या फिर बदरीनाथ मार्ग पर ब्रह्मपुरी होते हुए नीलकंठ मार्ग पकड़ सकते हैं।
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