यूपी-उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी कहते थे कि 65 साल तक देश में सक्रिय राजनीति कर देश को दिया मेरे पिता का योगदान देखें, उनसे जुड़ी कंट्रोवर्सी नहीं। मैं दावे से कह सकता हूं कि तीन बार उत्तर प्रदेश और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने विकास का जो जाल बुना है वो राजनेताओं के लिए मिसाल है, था और हमेशा रहेगा। देश में ऐसा एक भी शख्स नहीं, जो उनकी बराबरी पर हो। एनडी प्यार से रोहित को गुंजनू बुलाते थे। मार्च 2014 में कानूनी विवाद खत्म होने के बाद से पिता के साथ रह रहे रोहित कहते थे कि बीते 4 साल में मुझे मेरे पिता से इतना प्यार मिला कि मैं बचपन के दिन पूरी तरह भूल चुका हूं।
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rohit shekhar tiwari
अटल बिहारी वाजपेयी और प्रणव मुखर्जी मेरे पिता से पीछे: रोहित तिवारी कहते थे कि मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं उस इंसान का पुत्र हूं जिसे देश के लाखों लोग निस्वार्थ सेवा के लिए बेइंतहा प्यार करते हैं। गर्व के साथ कहते थे कि मेरे पिता ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी, जेल गए, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ समय बिताया। जहां मदन मोहन मालवीय जी के पीए के रूप में काम किया तो वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ भी काम किया। वर्ष 1952 से 2009 तक मेरे पिता ने देश की पूरी ईमानदारी और लगन से सेवा की है। मुझे लगता है कि अटल बिहारी वाजपेयी और प्रणव मुखर्जी भी इस मामले में उनसे पीछे ही होंगे।
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rohit shekhar tiwari
पिता के निधन पर यूपी सरकार के बारे में कही ये बात: पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के निधन पर रोहित शेखर यूपी सरकार की तारीफ करते हुए भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि बगैर कुछ कहे यूपी सरकार ने जितना सम्मान उनके परिवार को दिया, उतना किसी विरले नेता को मिलता है। दिल्ली से लखनऊ पार्थिव शरीर लाने के लिए यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा खुद दिल्ली पहुंचे थे। लखनऊ में योगी आदित्य नाथ ने उनके पार्थिव शरीर को विधानसभा में रखवाया। दलों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव, अम्मार रिजवी, मंत्री रीता बहुगुणा जोशी एक साथ आए।
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रोहित शेखर तिवारी
- फोटो : amar ujala
पिता की अस्थियां विसर्जित करते हुए भावुक: पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के निधन पर रोहित शेखर उनकी अस्थियां विसर्जित करते हुए काफी भावुक हो गए थे। उन्होंने अपने पिता के राजनीतिक सफर को लेकर तमाम राजनीतिक दलों के लिए बड़ी बात कह दी। अस्थि विसर्जन के बाद पत्रकारों से बातचीत में रोहित शेखर तिवारी ने कहा था कि उनके पिता के जीवन से आज के नेताओं को सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन विकास के लिए समर्पित रहा, लेकिन राजनीतिक दलों ने उनके कद के अनुरूप उन्हें सम्मान नहीं दिया। उनके पिता स्वयं में विश्वविद्यालय थे। राजनेता और समाजसेवी के रूप में उनका जीवन अद्वितीय रहा।
पिछले साल 11 मई को हुई थी रोहित की शादी: रोहित शेखर तिवारी की शादी पिछले साल 11 मई को इंदौर मध्यप्रदेश निवासी अपूर्वा शुक्ला के साथ हुई थी। ई दिल्ली के पांच अशोक रोड स्थित आनंदा भवन में हुए विवाह समारोह में कई नेताओं ने शिरकत की। इसमें उत्तराखंड के मौजूदा सीएम, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, यूपी की मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, डॉ अंबार रिजवी, खटीमा विधायक हरीश धामी, हल्द्वानी के पीयूष डालाकोटी, हल्दूचौड़ से दुम्का परिवार एवं एनडी तिवारी के पैतृक गांव के ग्रामीणों ने भी पहुंचकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया था।