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यादों में एनडी: जीते जी अपनी यह दिली ख्वाहिश पूरी नहीं कर पाए नारायण दत्त तिवारी

Sun, 21 Oct 2018 10:22 AM IST
अभिषेक सिंह, अमर उजाला, हल्द्वानी
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फाइल फोटो - फोटो : pti
लंबी जद्दोजहद के बाद पूर्व सीएम एनडी तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा माना और उनकी मां उज्ज्वला से सबके समक्ष 88 साल की उम्र में विवाह करके इस गुमनाम रिश्ते को पवित्र रिश्ते का नाम दिया। रोहित ने भी बेटे की हर जिम्मेदारी निभाते हुए पिता एनडी तिवारी का पूरा ख्याल रखा। लेकिन, एनडी तिवारी के अपने परिवार वाले उनसे दूर होते चले गए।
 
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nd tiwari - फोटो : ट्विटर
इतना सब होने के बावजूद तिवारी जी को इस बात का मलाल अंतिम समय तक रहा कि वह अपने बेटे को राजनीति में स्थापित नहीं करवा पाए। वहीं, उनसे राजनीति का ककहरा सीखने वाले यशपाल आर्य ने अपने बेटे संजीव आर्य को राजनीति की कक्षा में प्रवेश भी दिलाया और विधायक भी बनवाया।
 
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एनडी तिवारी - फोटो : ट्विटर
एनडी तिवारी ने अपने बेटे का राजनीतिक भविष्य संवारने के लिए उसे कांग्रेस में लाने की कई बार कोशिश की, लेकिन कहते हैं कि खुद को तिवारी का शिष्य बताने वाले हरीश रावत ने उन्हें पार्टी में आने ही नहीं दिया। बाद में जरूर कांग्रेस ने रोहित को दायित्व सौंपा, लेकिन पहले हुई फजीहत से नाराज रोहित ने पद लेने से इनकार कर दिया।
 

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एनडी तिवारी
इस बीच, एनडी तिवारी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बीच नजदीकियों की खबरें मीडिया में आईं। जल्द ही इसका असर भी दिखा जब सपा सरकार ने रोहित शेखर को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया। लेकिन, बाद में उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया। 2017 में अचानक विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह के बुके देने की फोटो के साथ एनडी के भाजपा में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया।
 
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खांटी समाजवादी से कांग्रेसी बने एनडी तिवारी के भाजपा में जाने की बात किसी को हजम नहीं हुई। किसी ने इसे बेटे रोहित शेखर के लिए किया गया उसूलों से समझौता बताया तो किसी ने कुछ और। पहले तो एनडी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच किसी तरह का बुनियादी फर्क नहीं होने का बयान देकर मीडिया को एक और मुद्दा दे दिया। 
 
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नारायण दत्त तिवारी
इधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तरप्रदेश से लेकर उत्तराखंड के ब्राह्मण वर्ग के मतदाताओं में सेंध लगाने के लिए एनडी को पार्टी में शामिल करने का जो दांव चला था वो पार्टी के भीतर एनडी की छवि को लेकर शुरू हुए विरोध से फेल होता नजर आया। आखिरकार भाजपा अध्यक्ष की इस दुविधा को एनडी तिवारी ने यह कहकर दूर कर दिया कि वह खांटी कांग्रेसी हैं और ताउम्र कांग्रेसी ही रहेंगे।
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ND Tiwari - फोटो : AmarUjala
हालांकि, इस बयान के बावजूद एनडी तिवारी यूपी और उत्तराखंड की कुछ सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार करते नजर आए। अपने कद के विपरीत इस कदम के पीछे उनका पुत्र मोह ही माना गया। लेकिन, उसूलों से किए गए इस समझौते से भी तिवारी जीते जी अपने पुत्र को राजनीति में स्थापित नहीं करा पाए।
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